ओल्ड रीजीम के टैक्सपेयर्स को यूनियन बजट 2026 में बड़ी सौगात मिलने वाली है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को इसका ऐलान करेंगी। अब तक उनका फोकस इनकम टैक्स की नई रीजीम पर रहा है। इस बार वह इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने का ऐलान यूनियन बजट में करेंगी।
सेक्शन 80सी में कौन-कौन ऑप्शंस शामिल हैं?
टैक्सपेयर्स डिडक्शन के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल सेक्शन 80सी का करते हैं। इस सेक्शन के तहत करीब एक दर्जन इनवेस्टमेंट ऑप्शंस आते हैं। इनमें पीपीएफ, म्यूचुअल फंड्स की टैक्स स्कीम (ELSS), लाइफ इंश्योरेंस स्कीम शामिल हैं। दो बच्चों के ट्यूशन फीस पर डिडक्शन भी इस सेक्शन के तहत क्लेम किया जा सकता है। होम लोन के प्रिंसिपल पर भी इस सेक्शन के तहत डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। लेकिन, ये सभी डिडक्शन इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम में मिलते हैं।
अभी मैक्सिमम कितना डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले कई सालों से सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन की लिमिट नहीं बढ़ाई गई है। एक वित्त वर्ष में सेक्शन 80सी के तहत आने वाले ऑप्शंस में मैक्सिम 1.5 लाख रुपये तक निवेश कर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। इस बार वित्तमंत्री डिडक्शन की मैक्सिमम लिमिट बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर सकती है। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि होम लोन के प्रिंसिपल पर अलग से डिडक्शन मिलनी चाहिए। इसकी वजह यह है सेक्शन 80सी में पहले से कई इनवेस्टमेंट ऑप्शंस शामिल हैं।
सेक्शन 80सी का सेविंग्स में क्या योगदान है?
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी का परिवारों की सेविंग्स बढ़ाने में बड़ा योगदान रहा है। इसके तहत आने वाले पीपीएफ और ईएलएसएस का इस्तेमाल लोग लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट के लिए करते हैं। पीपीएफ और ईएलएसएस रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए भी अच्छे हैं। इनकम टैक्स की पुरानी स्कीम के टैक्सपेयर्स लंबे समय से अपने लिए राहत की मांग कर रहे है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020 में नई रीजीम के एलान के बाद से ज्यादा फोकस इसी रीजीम पर रखा है। इस पर उनकी शिकायत दूर हो जाने की उम्मीद है।