UPI Payment: डिजिटल पेमेंट करने वालों के लिए एक अहम खबर है। सरकार अब 3,000 रुपये या उससे ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने पर विचार कर रही है। सरकार MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगा सकती है। अभी तक UPI से पेमेंट करने पर न तो ग्राहक को कोई चार्ज देना पड़ता है और न ही ट्रेडर्स से कोई फीस ली जाती है। इसे ही Zero MDR Policy कहते हैं। लेकिन अब यह सिस्टम 3,000 रुपये या उससे ऊपर की यूपीआई पेमेंट पर बदल सकता है।
MDR दरअसल एक फीस होती है जो बैंक या पेमेंट ऐप कंपनियां ट्रेडर्स से वसूलती हैं, जब कोई ग्राहक उनके यहां UPI से पेमेंट करता है। सरकार फिलहाल इस तरह का चार्ज केवल सिर्फ 3,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लगाने की सोच रही है। इसका मतलब है कि आम लोग जो रोजमर्रा की छोटी खरीदारी UPI से करते हैं, जैसे सब्ज़ी, किराना, दूध या ऑनलाइन फूड ऑर्डर करते हैं, उन पर कोई असर नहीं होगा।
सरकार क्यों कर रही है MDR लगाने पर विचार?
इस प्रस्ताव का मकसद यह है कि बैंकों और UPI पेमेंट कंपनियों को एक स्थायी कमाई का जरिया मिल सके। ताकि वह इस सर्विस को लंबे समय तक बिना नुकसान के चला सकें। Payment Council of India पहले ही सरकार से Zero MDR नीति खत्म करने की सिफारिश कर चुका है। इस बदलाव की जरूरत इसलिए भी महसूस की जा रही है क्योंकि UPI का इस्तेमाल भारत में जबरदस्त तरीके से बढ़ रहा है।
1 जून 2025 को 644 मिलियन (64.4 करोड़) UPI ट्रांजैक्शन हुए।
2 जून 2025 को यह आंकड़ा 650 मिलियन (65 करोड़) तक पहुंच गया।
ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि UPI अब अंतरराष्ट्रीय पेमेंट कंपनियों, जैसे कि Visa से भी आगे निकलने को तैयार है। उदाहरण के लिए Visa का औसत रोज़ाना ट्रांजैक्शन लगभग 639 मिलियन आंका गया है। मई 2025 में, भारत में कुल 14 बिलियन (1,400 करोड़) से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 20 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा रही।
सरकार का कहना है कि अगर बड़े ट्रांजैक्शन पर थोड़ा MDR लिया जाए, तो इससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और मजबूत किया जा सकता है और बैंकों को इसके ऑपरेशन में मदद मिलेगी। फिलहाल ये प्रस्ताव शुरुआती चर्चा में है, और इसे लागू करने से पहले सरकार ट्रेडर्स और पेमेंट कंपनियों से बातचीत करेगी। लेकिन इतना तय है कि आम लोगों के लिए UPI से छोटे पेमेंट पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।