US-Iran Conflict: विदेश में फंसे हवाई यात्रियों को ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी से कितनी मदद मिल सकती है?

विदेश यात्रा से पहले ट्रेवल इंश्योरेंस लेना जरूरी होता है। लेकिन, हवाई सेवाओं में किसी वजह से बाधा होने पर आपको क्लेम मिलेगा या नहीं, यह दो बातों पर निर्भर करता है। पहला है हवाई सेवाओं में बाधा की वजह और दूसरा पॉलिसी कब खरीदी गई थी

अपडेटेड Mar 03, 2026 पर 8:04 PM
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लॉस की वजह एक्टिव वॉर की स्थिति होने पर बीमा कंपनी आम तौर पर वॉर एक्सक्लूजन क्लॉज के तहत लायबिलिटी को कवर नहीं करती है।

मध्यपूर्व में हालात बिगड़ने से कई एयरलाइंस ने अपनी फ्लाइट्स कैंसिल की है या उनके रूट में बदलाव किए हैं। इससे सैकड़ों हवाई यात्री ट्रांजिट एयरपोर्ट्स पर फंस गए हैं। इनमें कई भारतीय हवाई यात्री हैं। उन्हें नहीं पता कि उन्हें कब तक इंतजार करना पड़ेगा। घर से दूर लंबे समय तक रहने में उन्हें कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें हेल्थ इमर्जेंसी शामिल है। सवाल है कि ऐसी स्थिति में उनकी इंश्योरेंस पॉलिसी कितना काम आएगी?

फॉरेन ट्रिप से पहले ट्रैवल इंश्योरेंस लेने में फायदा

ट्रैवल इंश्योरेंस डोमेस्टिक ट्रिप के लिए अनिवार्य नहीं है। लेकिन, विदेश यात्रा से पहले ट्रेवल इंश्योरेंस लेना जरूरी होता है। लेकिन, हवाई सेवाओं में किसी वजह से बाधा होने पर आपको क्लेम मिलेगा या नहीं, यह दो बातों पर निर्भर करता है। पहला है हवाई सेवाओं में बाधा की वजह और दूसरा पॉलिसी कब खरीदी गई थी।


पॉलिसी समस्या शुरू होने से पहले खरीदी गई होनी चाहिए

अगर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने से यात्री अचानक एयरस्पेस बंद होने से दुबई, तेहरान, कतर या पश्चिम एशिया में फंस जाता है तो ट्रिप डिले, ट्रिप इंटरप्शन या मिस्ड कनेक्शन बेनेफिट्स के तहत बीमा कंपनी उसके क्लेम पर विचार कर सकती है। शर्त यह है कि प्रॉब्लम शुरू होने से पहले पॉलिसी खरीदी गई होनी चाहिए।

फ्लाइट कैंसल या एयरपोर्ट बंद होने से जुड़े क्लेम पर विचार

पॉलिसी एक्स डॉट कॉम के फाउंडर और सीईओ नवल गोयल ने कहा, "ट्रैवलर्स को यह ध्यान में रखना जरूरी है कि ज्यादातर इंश्योरेंस पॉलिसी जो ट्रैवलर्स को कवर करती हैं वह उन क्लेम को बाहर रखती हैं जिसकी वजह सरकार की तरफ से युद्ध या लड़ाई का ऐलान होता है। अगर फ्लाइट कैंसिलेशन या एयरपोर्ट बंद होने जैसे ऑपरेशनल वजह से क्लेम आता है तो उस पर कंपनी विचार करती है। अभी जो स्थिति चल रही है, उसे देखते हुए यह काफी अहम शर्त है।"

एक्टिव वॉर की स्थिति से लॉस हुआ तो वॉर एक्सक्लूज क्लॉज लागू हो सकता है

लॉस की वजह एक्टिव वॉर की स्थिति होने पर बीमा कंपनी आम तौर पर वॉर एक्सक्लूजन क्लॉज के तहत लायबिलिटी को कवर नहीं करती है। मुश्किल तब पैदा होता है जब अघोषित टकराव, प्रीकॉशनरी डायवर्ज या अचानक एयरस्पेस शटडाउन जैसी स्थिति पैदा होती है, जिसे सरकार की तरफ युद्ध घोषित नहीं किया जाता है। ऐसी स्थिति में क्लेम का एप्रूवल इस बात पर निर्भर करता है कि लॉस की वजह टकराव से किस हद तक जुड़ा है। दूसरा, बीमा कंपनी पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक इसे डायरेक्ट या इनडायरेक्ट परिणाम में से क्या मानती है।

ट्रैवल के बीमार पड़ने पर हादसे का शिकार होने पर मदद

हालांकि, ट्रैवल मेडिकल इंश्योरेंस में हॉस्पिटल में भर्ती होने, इलाज या इमर्जेंसी इवैकुएशन की स्थिति में बीमा कंपनी मुआवजा देती है। अगर ट्रैवलर बीमार पड़ जाता है या ऐसे हादसे का शिकार हो जाता है जो टकराव से जुड़ा नहीं है तो क्लेम आम तौर पर क्लेम एप्रूव हो जाता है। लेकिन, मिलिट्री एक्शन या सैन्य टकराव की स्थिति में क्लेम एप्रूव नहीं होता है।

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लड़ाई से प्रभावित इलाके में इलाज कवर नहीं होता है

इंश्योरेंस समाधान के को-फाउंडर और सीओओ शिल्पा अरोड़ा ने कहा, "करीब 99 फीसदी हेल्थ इंश्योरेंस लड़ाई से प्रभावित एरिया में इलाज कवर नहीं करते हैं। बहुत कम राइडर्स हैं, जो लड़ाई प्रभावित क्षेत्रों में इलाज को कवर करते हैं। कुछ ग्रुप इंश्योरेंस हैं जो वॉर एरिया में ट्रैवल को कवर करते हैं। लेकिन, ऐसी पॉलिसीज पैरा मेडिकोज, जर्नलिस्ट और फोटोग्राफर्स को इश्यू की जाती हैं।"

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