Middle East Crisis: अमेरिका-ईरान की लड़ाई से आपके परिवार का मासिक बजट भी बिगड़ सकता है, जानिए कैसे

भारत करीब 90 फीसदी से ज्यादा क्रूड का आयात करता है। इसमें से करीब आधा क्रूड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचता है। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि क्रूड महंगा होने से माल ढुलाई खर्च बढ़ेगा। इससे कई चीजों के दाम बढ़ जाएंगे

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 4:05 PM
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इस लड़ाई के दूसरे हफ्ते में पहुंचने के साथ ही ऑयल और गैस की सप्लाई पर इसका असर दिखने लगा है।

अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई से क्रूड की कीमतों में उछाल आया है। क्रूड की कीमतें 120 डॉलर तक पहुंच गई थीं। उसके बाद उसमें थोड़ी नरमी आई है। हालांकि, एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है तो क्रूड की कीमतें फिर से बेकाबू हो सकती हैं। इसका असर न सिर्फ सरकार के खजाने पर पड़ेगा बल्कि आम आदमी की रोजाना की जिंदगी पर भी पड़ेगा।

क्रूड महंगा होने से माल ढुलाई खर्च बढ़ेगा

भारत करीब 90 फीसदी से ज्यादा क्रूड का आयात करता है। इसमें से करीब आधा क्रूड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचता है। इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि क्रूड महंगा होने से माल ढुलाई खर्च बढ़ेगा। इससे कई चीजों के दाम बढ़ जाएंगे। इससे इनफ्लेशन फिर से बढ़ सकता है।


रसोई गैस की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं

घरेलू रसोई गैस की कीमत पहले ही बढ़ चुकी है। 14.2 किलो घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 7 मार्च को 60 रुपये बढ़ गए। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर फूड सहित कई बिजनेसेज पर पड़ रहा है। सरकार ने अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। सरकार ने यह भी कहा है कि देश में कम से कम एक महीने तक इस्तेमाल लायक ऑयल का भंडार है।

ऑयल और गैस की सप्लाई पर पड़ने लगा है असर

अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी। इस लड़ाई के दूसरे हफ्ते में पहुंचने के साथ ही ऑयल और गैस की सप्लाई पर इसका असर दिखने लगा है। जल्द ही दूसरी कमोडिटीज की कीमतों में भी इजाफा दिख सकता है। इसका सीधा असर परिवार के बजट पर पड़ेगा।

इनफ्लेशन 30-40 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ सकता है

कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज ने कहा, "क्रूड ऑयल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि करेंट अकाउंट डेफिसिट 18-20 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है। यह जीडीपी के 0.5 फीसदी के बराबर है।" उन्होंने कहा कि अगर लड़ाई जारी रहती है और सरकार कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए कोई कदम नहीं उठाती है तो इनफ्लेशन 30-40 बेसिस प्वाइंट्स तक बढ़ सकता है। यह मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के लिए बड़ा चैलेंज होगा।

महंगाई पर आरबीआई की करीबी नजर

भारद्वाज ने कहा, "आरबीआई अप्रैल की मॉनेटरी पॉलिसी से पहले इस लड़ाई का इनफ्लेशन पर पड़ने वाले असर को देखना चाहेगा।" केंद्रीय बैंक ने फरवरी की मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा था। उन्होंने कहा कि चीजों की कीमतों पर असर इस बात पर निर्भर करता है कि यह लड़ाई कितने दिनों तक चलती है।

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ज्यादा इंटरेस्ट रेट वाले लोन लेने से बचें

हनी मनी फाइनेंशियल सर्विसेज के फाउंडर अनूप भैया ने कहा, "स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का असर फ्यूल की कीमतों और रुपये पर पड़ेगा। परिवारों पर शेयर बाजार में गिरावट और चीजों की बढ़ती कीमतों की दोहरी मार पड़ेगी।" एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी हाई इंटरेस्ट वाले लोन लेने से बचना ठीक रहेगा। अगर महंगाई की वजह से घर का मासिक बजट बढ़ता है तो लोन की EMI चुकाने में दिक्कत आ सकती है।

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