हर महीने चाहिए 10,000 रुपये की पक्की कमाई? जानिए FD में कितना पैसा लगाना पड़ेगा, वरना प्लान हो सकता है फेल

आज के समय में ज्यादातर लोग ऐसी कमाई चाहते हैं जिसमें जोखिम कम हो और हर महीने तय रकम खाते में आती रहे। इसी वजह से Fixed Deposit यानी एफडी आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है

अपडेटेड May 25, 2026 पर 4:42 PM
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अगर आपको हर महीने 10,000 रुपये की नियमित कमाई चाहिए, तो बैंक FD में आखिर कितना पैसा निवेश करना होगा?

आज के समय में ज्यादातर लोग ऐसी कमाई चाहते हैं जिसमें जोखिम कम हो और हर महीने तय रकम खाते में आती रहे। इसी वजह से Fixed Deposit यानी एफडी आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। खासकर रिटायर लोगों, नौकरीपेशा कर्मचारियों और सेफ निवेश पसंद करने वालों के बीच FD को भरोसेमंद माना जाता है। लेकिन सवाल यह है कि अगर आपको हर महीने 10,000 रुपये की नियमित कमाई चाहिए, तो बैंक FD में आखिर कितना पैसा निवेश करना होगा?

कई लोग सोचते हैं कि थोड़े से निवेश से अच्छी मंथली इनकम शुरू हो जाएगी, लेकिन असल गणित थोड़ा अलग है। ब्याज दर, टैक्स और FD के प्रकार के हिसाब से जरूरी रकम काफी बदल जाती है।

10,000 रुपये महीने कमाने के लिए कितना निवेश जरूरी?


अगर मौजूदा समय की बात करें तो ज्यादातर बैंक करीब 6% से 7% तक ब्याज दे रहे हैं। ऐसे में हर महीने लगभग 10,000 रुपये यानी सालाना 1.2 लाख रुपये ब्याज कमाने के लिए करीब 17 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक FD में लगाने पड़ सकते हैं।

मान लीजिए बैंक 7% सालाना ब्याज दे रहा है, तो 1.2 लाख रुपये सालाना कमाने के लिए लगभग 17 लाख रुपये का निवेश जरूरी होगा। वहीं अगर ब्याज दर 6% के आसपास है, तो यह रकम बढ़कर करीब 20 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।

यही वह बात है जिसे कई लोग नजरअंदाज कर देते हैं। सुरक्षित और स्थिर मंथली इनकम के लिए बड़ा निवेश होना जरूरी होता है।

टैक्स के बाद कम हो सकती है असली कमाई

FD से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स के दायरे में आता है। यानी बैंक भले ही आपको 10,000 रुपये महीना दे रहा हो, लेकिन टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाली रकम कम हो सकती है।

अगर कोई व्यक्ति ऊंचे टैक्स स्लैब में आता है, तो उसकी वास्तविक कमाई काफी घट सकती है। यही वजह है कि फाइनेंशियल एक्सपर्ट हमेशा सलाह देते हैं कि निवेश करने से पहले यह सोचें कि टैक्स के बाद वास्तव में कितनी रकम चाहिए।

मंथली पेआउट एफडी और Cumulative FD में क्या फर्क है?

FD दो तरह की होती हैं। पहली मंथली पेआउट एफडी, जिसमें हर महीने ब्याज सीधे खाते में आता रहता है। दूसरी Cumulative FD, जिसमें ब्याज जुड़ता रहता है और मैच्योरिटी पर पूरी रकम मिलती है। अगर किसी को हर महीने खर्च के लिए पैसे चाहिए, तो मंथली पेआउट एफडी ज्यादा बेहतर मानी जाती है। वहीं जो लोग पैसा बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए Cumulative FD फायदेमंद हो सकती है क्योंकि इसमें ब्याज पर भी ब्याज मिलता रहता है।

सीनियर सिटीजंस को मिलता है फायदा

अधिकांश बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों से थोड़ा ज्यादा ब्याज देते हैं। कई बार सिर्फ 0.5% अतिरिक्त ब्याज भी लंबे पीरियड में बड़ा फर्क पैदा कर देता है। इससे या तो मंथली इनकम बढ़ जाती है या फिर कम निवेश में भी वही कमाई हो सकती है। इसी वजह से रिटायर लोग आज भी FD को सुरक्षित विकल्प मानते हैं। बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर FD उन्हें मानसिक सुकून देती है।

सिर्फ FD पर निर्भर रहना सही है?

हालांकि FD सुरक्षित जरूर है, लेकिन इसकी भी सीमाएं हैं। सबसे बड़ा खतरा महंगाई का होता है। आज जो 10,000 रुपये पर्याप्त लग रहे हैं, आने वाले 5 या 10 साल बाद वही रकम छोटी पड़ सकती है। इसलिए एक्सपर्ट मानते हैं कि FD को पूरी कमाई का अकेला सहारा नहीं बनाना चाहिए। इसे एक बड़े फाइनेंशियल प्लान का हिस्सा बनाकर इस्तेमाल करना ज्यादा समझदारी माना जाता है।

निवेश से पहले ये सवाल जरूर पूछें?

सबसे जरूरी बात यह है कि आपको यह समझना होगा कि यह पैसा कितने समय तक चलाना है। अगर रिटायरमेंट के लिए निवेश कर रहे हैं, तो रकम लंबे समय तक टिकनी चाहिए। वहीं कुछ लोग सिर्फ अतिरिक्त मंथली इनकम के लिए FD करते हैं।

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