जब कोई लोन धारक जीवन से विदा हो जाता है, तो लोन की वापसी की जिम्मेदारी कई कारकों पर निर्भर करती है। सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि लोन सिक्योर्ड है या अनसिक्योर्ड। होम लोन या कार लोन जैसे सिक्योर्ड लोन में बैंक प्रॉपर्टी को गिरवी रखता है, इसलिए कर्जदार की मृत्यु के बाद भी बैंक उस संपत्ति को बेचकर बकाया वसूल सकता है। वहीं पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड के बकाया अनसिक्योर्ड होते हैं, जिनमें बैंक परिवार या कानूनी वारिसों से तुरंत वसूली का दबाव नहीं डालता और ऐसे लोन को बट्टे खाते (NPA) में डाल दिया जाता है।
