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लोन लेने वाले की मौत के बाद किसकी जिम्मेदारी होती है? जानिए गारंटर, सह-आवेदक और बैंक के नियम

लोन धारक की मृत्यु के बाद लोन चुकाने की जिम्मेदारी कानूनी वारिसों, सह-आवेदक या गारंटर पर निर्भर होती है। अनसिक्योर्ड लोन की स्थिति में परिवार की व्यक्तिगत संपत्ति तक जिम्मेदारी सीमित रहती है और बैंक अक्सर बकाया को बट्टे खाते में डाल देता है।

Edited By: Shradha Tulsyanअपडेटेड Oct 30, 2025 पर 10:19 PM
लोन लेने वाले की मौत के बाद किसकी जिम्मेदारी होती है? जानिए गारंटर, सह-आवेदक और बैंक के नियम

जब कोई लोन धारक जीवन से विदा हो जाता है, तो लोन की वापसी की जिम्मेदारी कई कारकों पर निर्भर करती है। सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि लोन सिक्योर्ड है या अनसिक्योर्ड। होम लोन या कार लोन जैसे सिक्योर्ड लोन में बैंक प्रॉपर्टी को गिरवी रखता है, इसलिए कर्जदार की मृत्यु के बाद भी बैंक उस संपत्ति को बेचकर बकाया वसूल सकता है। वहीं पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड के बकाया अनसिक्योर्ड होते हैं, जिनमें बैंक परिवार या कानूनी वारिसों से तुरंत वसूली का दबाव नहीं डालता और ऐसे लोन को बट्टे खाते (NPA) में डाल दिया जाता है।

सह-आवेदक और गारंटर की भूमिका

अगर लोन में कोई सह-आवेदक है, तो कर्जदार की मृत्यु के बाद उसकी पूरी जिम्मेदारी सह-आवेदक पर आ जाती है। बैंक सबसे पहले सह-आवेदक से संपर्क करता है। वैसे ही अगर सह-आवेदक ना हो तो गारंटर जिम्मेदार होता है। गारंटर उस व्यक्ति को कहते हैं जो मुख्य कर्जदार की ओर से लोन चुकाने की गारंटी देता है। इसलिए गारंटर बनने से पहले उसकी आर्थिक स्थिति और लोन की शर्तें समझना बहुत जरूरी होता है, नहीं तो बाद में मुश्किल हो सकती है।

कानूनी वारिसों की देनदारी

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