SIP discontinuation: म्यूचुअल फंड में घट रहा निवेश, जानिए किन 5 वजह से SIP बंद कर रहे निवेशक

SIP discontinuation: AMFI के ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि SIP स्टॉपेज तेजी से बढ़ा है। दिसंबर 2025 में SIP बंद करने का रेशियो 85% तक पहुंच गया, जो काफी चिंताजनक है। जानिए 5 कारण, जिसकी वजह से निवेशक SIP बंद कर रहे हैं।

अपडेटेड Jan 12, 2026 पर 9:28 PM
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महंगाई, EMI, बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल खर्च और नौकरी से जुड़ी अनिश्चितता ने भी SIP पर असर डाला है।

SIP discontinuation: सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) को लॉन्ग टर्म में बड़ा फंड बनाने का सबसे लोकप्रिय रास्ता है। लेकिन, अब डेटा बता रहा कि SIP करने वालों की संख्या कम हो रही। कई लोग अपनी SIP बंद कर रहे या उसे रिडीम कर रहे हैं।

आखिर निवेशक अपनी SIP क्यों बंद कर रहे हैं, उन्हें किस बात का डर है, इसे आगे समझेंगे। लेकिन, पहले म्यूचुअल फंड में SIP का हालिया ट्रेंड समझ लेते हैं, ताकि पूरी तस्वीर समझ लें।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के दिसंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश घटा है। दिसंबर में इक्विटी MF का नेट इनफ्लो 6.21% गिरकर ₹28,054.06 करोड़ रह गया, जो नवंबर में ₹29,911.05 करोड़ था। डेट म्यूचुअल फंड से भी निकासी कई गुना बढ़ी है।


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म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री से निकल रहा पैसा

इक्विटी और डेट दोनों को मिलाकर देखें तो दिसंबर में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में कुल नेट आउटफ्लो ₹66,590.70 करोड़ रहा। इसका असर एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) पर भी दिखा। इंडस्ट्री का कुल AUM 0.7% घटकर ₹80,23,378.99 करोड़ रह गया, जबकि नवंबर में यह ₹80,80,369.52 करोड़ था।

पिछले एक साल में इक्विटी म्यूचुअल फंड का नेट इनफ्लो

महीना नेट इनफ्लो (₹ करोड़)
पिछले महीने से बदलाव
दिसंबर 2025 28,054.06 -6.21%
नवंबर 2025 29,911.05 0.214
अक्टूबर 2025 24,690.33 -18.80%
सितंबर 2025 30,421.69 -8.90%
अगस्त 2025 33,430.37 -21.70%
जुलाई 2025 42,702.35 0.8104
जून 2025 23,587.05 0.24
मई 2025 19,013.12 -21.63%
अप्रैल 2025 24,269.26 -3.24%
मार्च 2025 25,082.01 -14.41%
फरवरी 2025 29,303.34 -26.19%
जनवरी 2025 39,687.78 -3.56%
दिसंबर 2024 41,155.91 0.1451

डेटा: AMFI

ये आंकड़े म्यूचुअल फंड SIP को लेकर एक दिलचस्प ट्रेंड बताते हैं। अगर अक्टूबर 2025 को छोड़ दें, तो इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करीब 6 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। दिसंबर 2025 में SIP स्टॉपेज रेशियो करीब 85 फीसदी तक पहुंच गया। मतलब कि दिसंबर 2025 में जितनी नई SIP शुरू हुईं, उनके मुकाबले लगभग 85 फीसदी SIP या तो बंद कर दी गईं या रोक दी गईं। इसे बेहद खराब माना जाता है।

इससे सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर लोग SIP से पीछे क्यों हट रहे हैं। आइए वे 5 बड़े कारण जानते हैं, जिसके चलते निवेशक SIP बंद कर रहे हैं।

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1. SIP की तय अवधि पूरी होना

AMFI का लेटेस्ट डेटा बताता है कि SIP बंद होने की सबसे बड़ी वजह डर या बाजार गिरावट नहीं, बल्कि SIP का अपना तय टेन्योर पूरा होना है। बड़ी संख्या में निवेशकों ने 3 साल, 5 साल या 7 साल की SIP शुरू की थी, जो अब अपने अंत पर पहुंच चुकी हैं।

जैसे ही तय अवधि पूरी होती है, SIP अपने आप बंद हो जाती है या निवेशक उसे आगे बढ़ाने का फैसला नहीं करता। यही वजह है कि स्टॉपेज के आंकड़े अचानक बढ़ते नजर आ रहे हैं।

2. बाजार में लगातार गिरावट

हाल के महीनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। कभी ऑल टाइम हाई, तो कभी तेज गिरावट। ऐसे माहौल में कई निवेशकों को लगने लगा कि SIP से वह रिटर्न नहीं मिल रहा, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। खासकर नए निवेशक, जिन्होंने पिछले 1-2 साल में SIP शुरू की थी।

ऐसे निवेशकों का रिटर्न काफी कम या फिर निगेटिव में है। इससे नए निवेशक घबरा गए और SIP रोक दी। यह फैसला ज्यादातर भावनात्मक रहा, न कि लॉन्ग टर्म सोच पर आधारित।

3. जल्दी रिटर्न की उम्मीद से बढ़ी निराशा

SIP का असली फायदा लंबी अवधि में दिखता है, लेकिन बड़ी संख्या में निवेशक इसे शॉर्ट टर्म निवेश समझ बैठे। जब 6 महीने या 1 साल में रिटर्न उम्मीद के मुताबिक नहीं आया, तो SIP को बेकार मान लिया गया।

यह ट्रेंड खासकर उन निवेशकों में दिखा, जो सोशल मीडिया या तेजी की कहानियों से प्रभावित होकर SIP में आए थे और धैर्य नहीं रख पाए। ऐसे ही निवेशक ज्यादा SIP बंद कर रहे हैं।

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4. मार्केट टाइमिंग का लालच

कई निवेशकों ने SIP इसलिए रोकी क्योंकि बाजार ऊंचे स्तर पर दिख रहा था। उन्हें लगा कि अभी SIP रोक देते हैं और गिरावट आने पर दोबारा शुरू करेंगे। यह सोच कागज पर सही लगती है, लेकिन व्यवहार में अक्सर गलत साबित होती है।

मार्केट टाइमिंग की यह कोशिश SIP बंद होने की एक बड़ी वजह बन रही है, खासकर अनुभवी दिखने वाले लेकिन अनुशासनहीन निवेशकों में।

5. बढ़ते खर्च और कैश फ्लो का दबाव

महंगाई, EMI, बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल खर्च और नौकरी से जुड़ी अनिश्चितता ने भी SIP पर असर डाला है। कई परिवारों ने जरूरत के समय सबसे पहले SIP को ही रोका, क्योंकि यह खर्च नहीं बल्कि निवेश माना जाता है।

जैसे ही कैश फ्लो पर दबाव बढ़ा, SIP सबसे आसान विकल्प बन गई जिसे बंद किया जा सके। साथ ही, कई लोग घर या गाड़ी खरीदने जैसे लक्ष्य पूरा करने के लिए भी SIP रोक रहे हैं।

SIP से भरोसा खत्म होना नहीं

यह समझना जरूरी है कि SIP बंद होने के आंकड़े पूरे सच को नहीं दिखाते। SIP में आने वाला मासिक निवेश अभी भी रिकॉर्ड स्तर पर है। यानी पुराने निवेशक SIP पूरी करके बाहर निकल रहे हैं, वहीं नए निवेशक सिस्टम में प्रवेश कर रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, इसे SIP से मोहभंग नहीं, बल्कि निवेश चक्र का स्वाभाविक बदलाव माना जाना चाहिए।

साथ ही, कई निवेशक अपने SIP को दूसरे एसेट में ले जा रहे हैं, जहां अच्छा रिटर्न मिल रहा है। जैसे कि गोल्ड, सिल्वर और कॉपर जैसे मेटल। दिसंबर में गोल्ड ETF में निवेश जबरदस्त बढ़ा। इनफ्लो 211.2% उछलकर ₹11,646.74 करोड़ पहुंच गया। यह भी इक्विटी म्यूचुअल फंड में घटती SIP की एक अहम वजह है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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