डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ वित्तीय सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है। कई बार लोगों को पता भी नहीं चलता और उनकी जानकारी का गलत इस्तेमाल कर कोई और लोन ले लेता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अपनी क्रेडिट रिपोर्ट को लॉक करके रखना बेहतर है या जरूरत पड़ने पर ही अनलॉक करना चाहिए?
क्रेडिट रिपोर्ट को लॉक करने का मतलब है कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्था आपकी क्रेडिट हिस्ट्री तक पहुंच नहीं पाएगी। इससे आपकी जानकारी सुरक्षित रहती है और धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाती है। कोई भी व्यक्ति आपकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं ले सकता। यह आपको मानसिक सुकून भी देता है कि आपकी वित्तीय प्रोफाइल सुरक्षित है।
हालांकि, रिपोर्ट को हमेशा लॉक रखना भी व्यावहारिक नहीं है। जब आप होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक को आपकी क्रेडिट हिस्ट्री देखने की ज़रूरत होती है। नया क्रेडिट कार्ड लेने के लिए भी रिपोर्ट को अस्थायी रूप से अनलॉक करना पड़ता है। अनलॉक करने से बैंक तुरंत आपकी प्रोफाइल चेक कर पाते हैं और लोन अप्रूवल जल्दी होता है।
क्रेडिट रिपोर्ट को लॉक या अनलॉक करना पूरी तरह आपकी वित्तीय जरूरतों और सुरक्षा पर निर्भर करता है। अगर आप फिलहाल कोई नया लोन नहीं ले रहे हैं, तो इसे लॉक रखना सबसे सुरक्षित विकल्प है। वहीं, जब भी आपको लोन या क्रेडिट कार्ड की ज़रूरत हो, तो रिपोर्ट को अस्थायी रूप से अनलॉक कर सकते हैं। इस तरह आप अपनी जानकारी को सुरक्षित रखते हुए वित्तीय सुविधाओं का लाभ भी उठा पाएंगे।