मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सीईआईसी डेटा के मुताबिक, फरवरी 2025 में इंटरबैंक मोबाइल पेमेंट्स की कुल वैल्यू करीब 26.5 लाख करोड़ रुपये थी, जो जनवरी 2026 में बढ़कर करीब 34.1 लाख करोड़ रुपये हो गई। डिजिटल पेमेंट्स की वजह से फाइनेंशियल सर्विसेज तक लोगों की पहुंच बढ़ी है। लेकिन, ब्रोकरेज फर्म जीरोधा के नितिन कामत की सोच इस बारे में अलग है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किया पोस्ट
कामत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि वह नेट बैंकिंग ऐप्स का इस्तेमाल क्यों नहीं करना चाहते। इसके बाद ऐसे ऐप्स के इस्तेमाल को लेकर यूजर्स की चिंता बढ़ी है। उन्होंने बताया कि वह इसलिए इन ऐप्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, क्योंकि ये यूजर्स से कई तरह की परमिशन मांगते हैं।
गैर-जरूरी परमिशन मांगते हैं बैंकों के एप्स
उन्होंने बताया है कि इसमें से कई तरह के परमिशन गैर-जरूरी होते हैं। जैसे ये ऐप्स एसएमएस, कॉन्टैक्ट्स और फोन डेटा एक्सेस की परमिशन मांगते हैं, जबकि ये परमिशन बेसिक बैंकिंग फंक्शन के लिए जरूरी नहीं हैं। इससे यह पूरा मसला एक बार फिर से सुविधा और यूजर प्राइवेसी के बीच संतुलन का बन गया है।
ऐसे कई परमिशन का कोई मतलब नहीं
कामत ने एक्स पर लिखा है, "मैं अपने फोन पर नेट बैंकिंग एप्स का इस्तेमाल नहीं करता, क्योंकि वे जो जरूरी परमिशन मांगते हैं, उसका कोई मतलब नहीं है।" कामत के मुताबिक, ऐसा करना व्यापक रूप से स्वीकार्य साइबर सिक्योरिटी के आइडिया के खिलाफ है, जिसे 'प्रिंसिपल ऑफ लिस्ट प्रिविलेज' (PoLP) कहा जाता है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा बैंकिंग ऐप्स का इस्तेमाल
PoLP यह कहता है कि किसी सिस्टम या अप्लिकेशन को टास्क को पूरा करने के लिए कम से कम एक्सेस दिया जाना चाहिए। कामत ने पूछा है, "किसी बैंकिंग ऐप को मेरे एसएमएस, फोन, कॉन्टैक्ट्स आदि का एक्सेस क्यों चाहिए।" उन्होंने यह सवाल तब पूछा है कि जब भारत में लाखों यूजर्स डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में स्मार्टफोन-आधारित फाइनेंशियल सर्विसेज का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
यूजर्स की प्राइवेसी को होता है रिस्क
बैंकों की हालांकि यह दलील होती है कि एसएमएस एक्ससेज जैसी परमिशन से उन्हें ऑटोमैटिक ट्रांजेक्शन वेरिफिकेशन या फ्रॉड डिडेक्शन जैसे फीचर के इस्तेमाल में मदद मिलती है। लेकिन, आलोचकों का कहना है कि ऐसी परमिशन से यूजर्स की प्राइवेसी को बगैर किसी वजह रिस्क पैदा होता है। कामत ने इस मसले को अपनी कंपनी के सिद्धातों से जोड़ते हुए कहा है कि जीरोधा जो प्रोडक्ट्स बनाती है, उनमें यूजर की प्राइवेसी का खास ध्यान रखा जाता है।
जीरोधा के ऐप में नहीं मांगी जाती परमिशन
उन्होंने बताया कि जीरोधा के ट्रेडिंग ऐप काइट में किसी तरह की मोबाइल परमिशन नहीं मांगी जाती। उन्होंने कहा कि इससे यूजर्स का विश्वास हासिल करने में मदद मिलती है। उन्होंने गैर-जरूरी एक्सेस की जगह सेबी के टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उल्लेख किया। यह सिक्योरिटी और प्राइवेसी सुनिश्चित करने का ज्यादा संतुलित तरीका है।