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Aja Ekadashi 2026: आज अजा एकादशी के व्रत में जरूर सुनें राजा हरीशचंद्र की ये कथा, श्री हरि की कृपा से मिलेगा सभी कष्टों से छुटकारा

Aja Ekadashi 2026: आज भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी, अजा एकादशी का व्रत किया जा रहा है। आज के दिन एकादशी व्रत और पूजा के दौरान यहां दी जा रही राजा हरीशचंद्र की कथा जरूर सुननी चाहिए। इस कथा को सुनने से भगवान विष्णु की कृपा से सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 07, 2026 पर 10:50 AM
Aja Ekadashi 2026: आज अजा एकादशी के व्रत में जरूर सुनें राजा हरीशचंद्र की ये कथा, श्री हरि की कृपा से मिलेगा सभी कष्टों से छुटकारा
इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को अपने कष्टों से मुक्ति मिलती है।

Aja Ekadashi 2026: आज भगवान विष्णु को प्रिय एकादशी तिथि है। यह भाद्रपद माह कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसमें अजा एकादशी का व्रत किया जा रहा है। हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग माना जाता है। माना जाता है कि विधि-विधान और सच्ची श्रद्धा से एकादशी का व्रत करने वाले भक्तों को श्री हरि की परम कृपा प्राप्त होती है। आज अजा एकादशी के व्रत में राजा हरीशचंद्र की कथा सुनना बहुत शुभ माना जाता है। आइए जानें एकादशी व्रत की पूजा विधि और अजा एकादशी की व्रत कथा।

अजा एकादशी व्रत कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, अयोध्या में राजा हरिश्चन्द्र का शासन था। वह अपनी सत्यनिष्ठा, धर्मपरायणता और ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार देवताओं ने उनकी सत्य की परीक्षा लेने का विचार किया। इसी क्रम में राजा ने स्वप्न में देखा कि उन्होंने अपना पूरा राजपाट ऋषि विश्वामित्र को दान कर दिया है।

अगले दिन ऋषि विश्वामित्र वास्तव में राजा के पास पहुंचे और उन्हें उनके स्वप्न की याद दिलाते हुए राज्य दान करने की बात कही। राजा हरिश्चन्द्र ने अपने सत्यव्रत का पालन करते हुए बिना किसी संकोच के अपना समस्त राज्य ऋषि को सौंप दिया। इसके बाद दक्षिणा देने की आवश्यकता पड़ी तो राजा को अपनी पत्नी और पुत्र सहित स्वयं को भी बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा।

कहा जाता है कि राजा को एक चाण्डाल ने खरीद लिया था और वह उसके यहां दाह संस्कार के लिए आने वाले लोगों से कफन का शुल्क लेने का काम करने लगे। इतने कठिन हालात में भी राजा ने सत्य का साथ नहीं छोड़ा। लंबे समय तक इसी तरह जीवन बिताने के बाद वह अपने दुखों और कष्टों से बेहद परेशान हो गए और मुक्ति का मार्ग खोजने लगे।

एक दिन जब राजा इसी चिंता में बैठे थे, तभी महर्षि गौतम वहां पहुंचे। राजा ने उन्हें अपने जीवन में आई सभी परेशानियों और कष्टों के बारे में बताया। उनकी स्थिति सुनकर महर्षि गौतम ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को अपने कष्टों से मुक्ति मिलती है।

राजा हरिश्चन्द्र ने महर्षि गौतम के बताए अनुसार अजा एकादशी का व्रत रखा, भगवान विष्णु की पूजा की और रातभर जागरण किया। मान्यता है कि व्रत के प्रभाव से उनके सभी पाप नष्ट हो गए और उनके जीवन के दुख दूर होने लगे। उन्हें दोबारा अपना राज्य प्राप्त हुआ और परिवार के साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करने का अवसर मिला। अंत समय में राजा हरिश्चन्द्र अपने परिवार सहित स्वर्ग लोक को प्राप्त हुए।

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