Ashtami Navami 2026 date: अष्टमी-नवमी को होगा कन्या पूजन, जानें अष्टमी-नवमी की सही डेट और मुहूर्त

Ashtami Navami 2026 date: नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन किया जाता है। इस साल चैत्र नवरात्र में भी अष्टमी और नवमी तिथि पर छोटी-छोटी कन्याओं का पूजन किया जाएगा। आइए जानें इस साल अष्टमी और नवमी किस दिन मनाई जाएगी

अपडेटेड Mar 14, 2026 पर 6:36 PM
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चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है।

Chaitra Navratri 2026 dates: पूरे देश में नवरात्रि का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र की नवरात्रि हिंदू कैलेंडर की पहली नवरात्रि होती है। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और इसी दिन हिंदू नववर्ष का भी प्रारंभ होता है। इस साल चैत्र नवरात्रि की पूजा 19 मार्च से 27 मार्च तक होगी। इस दौरान अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। आइए जानें इस साल चैत्र नवरात्रि में अष्टमी और नवमी किस दिन होगी

कब है चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और रामनवमी 2026?

चैत्र नवरात्रि अष्टमी : इस साल चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 26 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह दिन मां महागौरी को समर्पित है। इस दिन सुबह कन्या पूजन करना फलदायी माना जाता है।

अष्टमी कन्या पूजन का मुहूर्त 

इस दिन कन्या पूजन का मुहूर्त सुबह 6:18 से 7:50 बजे और 10:55 से 1:59 बजे तक है।

राम नवमी : चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि 27 मार्च 2026, दिन शुक्रवार को पड़ रही है। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा और नवरात्र व्रत का पारण किया जाएगा।


नवमी कन्या पूजन का समय 

27 मार्च को कन्या पूजन का समय सुबह 6:17 से 10:54 बजे और दोपहर 12:27 से 1:59 बजे तक है। पूजा में भगवान राम को तुलसी जरूर अर्पित करें।

कन्या पूजन की विधि

धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्याओं में स्वयं मां दुर्गा वास करती हैं। इसलिए कन्या पूजन करना माता के बाल रूप की पूजा माना जाता है।

  • सुबह स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और कन्या पूजन का संकल्प लें।
  • इसके बाद सबसे पहले घर और पूजा स्थल को साफ करें।
  • कन्याओं का प्रेम पूर्वक स्वागत करें, उनके पैर धोएं, माथे पर तिलक लगाएं और चरणों में फूल-माला पहनाएं।
  • उन्हें लाल चुनरी या रुमाल दें और पूरी, हलवा, चना का भोजन कराएं।
  • भोजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा, फल, मिठाई या छोटे उपहार दें।
  • चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें और उन्हें विदा करें।

कन्या पूजन का महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह पूजा माता की कृपा और नवरात्रि के 9 दिन की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने का माध्यम है। भोग में पूरी, काले चने, हलवा या खीर रखा जाता है। उपहार में लाल चुनरी, चूड़ियां, बिंदी, पेन-कॉपी, फल, मिठाई, नारियल या छोटे खिलौने दिए जा सकते हैं।

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