Kharmas 2026: सूर्य के धनु या मीन राशि में गोचर को खरमास कहा जाता है। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार ये अशुभ काल होता है, जिसमें मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। माना जाता है कि सूर्य जब बृहस्पति की राशि में गोचर करते हैं, तो उनकी शक्ति क्षीण हो जाती है। शादी, मुंडन, गौना और जनेऊ आदि कार्यों के लिए सूर्य, बृहस्पति और शुक्र ग्रह का शुभ स्थिति में होना जरूरी माना जाता है।
खरमास साल में दो बार लगता है, एक बार मार्च में जब सूर्य देव मीन राशि में गोचर करते हैं। इसके बाद दिसंबर में, जब सूर्य देव का गोचर धनु राशि में होता है। बता दें, सूर्य हर महीने राशि परिवर्तन करते हुए पूरे वर्ष में सभी 12 राशि में गोचर करते हैं। इस तरह वो पूरे साल सभी राशियों में घूमते रहते हैं। लेकिन जब सूर्य का गोचर बृहस्पति की राशि धनु और मीन में होता है, तब खरमास लगता है। इस साल मीन खरमास शुरू होने की सही तारीख को लेकर लोगों में भ्रम है। आइए जानें इसका कारण
आधी रात को गुरु के घर पहुंचेंगे सूर्य
सूर्य अभी कुंभ में स्थित हैं। यहां से उनका गोचर गुरु बृहस्पति की राशि मीन में 14-15 मार्च की मध्य रात्रि में प्रवेश करेगा। इस वजह मीन संक्रांति की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं। कुछ पंचांग में 14 मार्च को और कुछ पंचांग में 15 मार्च को मीन संक्रांति मनाने की सलाह दी गई है।
14 अप्रैल तक बंद रहेंगे मांगलिक कार्य
खरमास में जरूर करें ये शुभ काम
मीन संक्रांति पर सुबह जल्दी जागें और स्नान के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें। जल में कुमकुम, चावल, लाल फूल डालें और ऊँ सूर्याय नम: मंत्र जप करते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं। सूर्य पूजा के बाद घर के आसपास जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं। ये संभव न हो, तो अनाज, धन, जूते-चप्पल, कपड़े दान करें। किसी मंदिर में पूजन सामग्री दान कर सकते हैं।
इसलिए खरमास में नहीं होते मांगलिक कार्य
विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कामों की शुरुआत पंचदेवों की पूजा के साथ ही होती है और सूर्य पंचदेवों में शामिल हैं। लेकिन खरमास के दिनों में सूर्य गुरु की सेवा में लगे रहते हैं और किसी अन्य शुभ काम में उपस्थित होने के लिए उपलब्ध नहीं होते हैं। इसलिए खरमास में शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं।