Baisakhi 2026 Date: भारत विविधताओं का देश है। हमारे देश में अलग-अलग राज्य, समुदाय और मान्यता के लोग रहते हैं और अपने पर्व और त्योहार मनाते हैं। ऐसा ही एक पर्व है बैसाखी। फसलों की कटाई का मौसम पूरा होने की खुशी में मनाए जाने वाले इस पर्व के साथ ज्योतिष, क्षेत्रीय और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। यह पर्व जहां एक ओर कृषि समुदाय के लिए रबी की फसल के कटने और नई फसल के मौसम की खुशी में मनाया जाता है। वहीं, ज्योतिष गणना के अनुसार इस दिन से नए सौर कैलेंडर की शुरुआत होती है। आइए जानें ये पर्व किस दिन मनाया जाएगा, इसका महत्व क्या है और मेष संक्रांति से इसका क्या संबंध है?
बैसाखी, मेष संक्रांति : 14 अप्रैल, मंगलवार
सूर्य गोचर मेष राशि में : 14 अप्रैल को सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर।
पुण्यकाल की तिथि : सुबह 5 बजकर 56 मिनट से लेकर शाम को 3 बजकर 55 मिनट तक।
बैसाखी का दिन सिख समुदाय के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके इतिहास की बात करें तो इस दिन साल 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने एक ऐसा समुदाय बनाया जो समानता, साहस और भक्ति के मूल्यों पर चले। इसी दिन पंज प्यारे की शुरुआत भी हुई थी जिसने सिख समाज में आध्यात्मिक अनुशासन और एकता को मजबूत किया।
बैसाखी और मेष संक्रांति से संबंध
बैसाखी का पर्व जहां पंजाब और हरियाणा राज्य के प्रमुख पर्व के तौर पर जाना जाता है। वहीं, इस दिन सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने पर मेष संक्रांति मनाई जाती है। ज्योतिष और क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन का खास महत्व है। सूर्य एक राशि में 30 दिन तक रहते हैं, इस तरह वे हर महीने राशि परिवर्तन करते हुए सभी 12 राशियों में गोचर करते हैं। मेष संक्रांति के दिन वे मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं और इस दिन नया सौर वर्ष आरंभ होता है। इस दिन से बंगाल, असम और ओडिश में नए साल की शुरुआत होती है।
वहीं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मीन राशि में सूर्य के गोचर के दौरान खरमास रहता है। मेष संक्रांति पर खरमास समाप्त होता है। खरमास में मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। मेष संक्रांति के बाद से मांगलिक और शुभ कार्य फिर से शुरू होते हैं।