Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी का पर्व बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है और पूरे भारत में ज्ञान, बुद्धि, संगीत और कला की देवी, मां सरस्वती को समर्पित है। ये त्योहार हर साल माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां सरस्वति इसी दिन प्रकट हुई थीं। इसलिए बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने की परंपरा है। ये दिन कला, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ कई प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन भी किए जाते हैं। इस साल बसंत पंचमी का त्योहार 23 जनवरी, 2026 को मनाया जाएगा। इस त्योहार की एक और बहुत बड़ी खासियत है पीला रंग। इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं, पीले रंग की मिठाई और अन्य खाने की चीजें मां सरस्वती को अर्पित करते हैं। सजावट और सरस्वती पूजा की रस्मों में भी ये रंग छाया रहता है।
बसंत पंचमी : शुक्रवार, 23 जनवरी, 2026
पंचमी तिथि समाप्त : 24 जनवरी, 2026 को मध्यरात्रि 01:46 बजे
पीला रंग ताजगी, सकारात्मकता, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है। भारत में बसंत पंचमी के आसपास का समय सरसों के खेतों के फूल खिलने का समय होता है। देश के कई हिस्से पीले रंग से ढके नजर आते हैं। इसलिए यह रंग वसंत और नई शुरुआत का प्राकृतिक प्रतीक माना जाता है।
बसंत पंचमी पर क्यों पहनते हैं पीले कपड़े?
बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। यह प्रकृति के साथ तालमेल और मां सरस्वती के प्रति भक्ति को दर्शाता है। छात्र और कलाकार अक्सर अपने-अपने क्षेत्रों में ज्ञान और प्रगति के लिए पीले कपड़े पहनते हैं। पीला रंग आशा, ज्ञान और नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।
पीला रंग और देवी सरस्वती के बीच संबंध
पीला रंग देवी सरस्वती से जुड़ा हुआ है क्योंकि यह बुद्धि, स्पष्टता और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सरस्वती पूजा के दौरान पीले कपड़े पहनने और पीले फूल चढ़ाने से सीखने, रचनात्मकता और सफलता के लिए उनका आशीर्वाद मिलता है।
क्या पीला पहनना अनिवार्य है?
पीला पहनना अनिवार्य नहीं है, लेकिन बसंत पंचमी की परंपराओं के हिस्से के रूप में इसे बहुत प्रोत्साहित किया जाता है। जो लोग पीला नहीं पहन सकते, वे अक्सर पूजा के दौरान एक्सेसरीज, फूलों या चढ़ावे के जरिए इस रंग को शामिल करते हैं।
पीले भोजन और सजावट की परंपरा
बसंत पंचमी में पीले भोजन के तौर पर केसरिया चावल, केसर वाली मिठाइयां और बूंदी के लड्डू जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं और प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं। घरों और मंदिरों को पीले फूलों, रंगोली और कपड़ों से सजाया जाता है।