Buddha Purnima 2026: बुध पूर्णिमा पर रवि योग का दुर्लभ संयोग कल, इस दिन जरूर करने चाहिए ये 5 काम

Buddha Purnima 2026: कल वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन बुध पूर्णिमा का पर्व भी मनाया जाता है। इस साल बुध पूर्णिमा पर रवि योग का दुर्लभ बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन 5 काम जरूर करने चाहिए। आइए जानें इस दिन के शुभ मुहूर्त और चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय

अपडेटेड Apr 30, 2026 पर 6:51 PM
माना जाता है कि बुद्ध पूर्णिमा पर उनके जीवन की तीन सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं हुई थीं।

Buddha Purnima 2026: बुध पूर्णिमा को हिंदू और बौद्ध धर्म अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। साल में आने वाले सभी 12 पूर्णिमा तिथियां जहां माता लक्ष्मी की समर्पित होती हैं, वहीं बौद्ध पूर्णिमा का दिन भगवान बुद्ध की शिक्षा को मनाने वाले उनके शिष्यों के लिए बेहद अहम है। वैशाख महीने की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस पावन तिथि को बुद्ध पूर्णिमा और बुद्ध जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस साल यह पर्व 1 मई 2026 को मनाया जाएगा।

बौद्ध धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान बुद्ध का जन्म इसी दिन हुआ था। इतना ही नहीं, माना जाता है कि इसी तिथि पर उनके जीवन की तीन सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं हुई थीं। ये हैं, उनका जन्म, उन्हें ज्ञान (निर्वाण) की प्राप्ति और उनका महापरिनिर्वाण (परम मोक्ष)। यही कारण है कि इसे आध्यात्मिक दृष्टि से साल की सबसे शक्तिशाली पूर्णिमाओं में से एक माना जाता है।

उदया तिथि के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा कल

पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 अप्रैल 2026 को रात 9:13 बजे से हो जाएगी और इसकी समाप्ति 1 मई को रात 10:53 बजे होगी। उदया तिथि के प्रभाव के कारण बुद्ध पूर्णिमा का व्रत और उत्सव शुक्रवार, 1 मई 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन 'रवि योग' का शुभ संयोग भी बन रहा है। स्नान-दान का शुभ मुहूर्त सुबह 4:15 बजे से 4:58 बजे तक रहेगा।

चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय

वैशाख पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देना बहुत पुण्यदायी माना जाता है। इससे चंद्र दोष में राहत मिलेती है। चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए इस दिन अर्घ्य देने से तनाव और मानसिक विकार दूर होते हैं। साथ ही यह माता लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि लाता है। इस दिन चंद्रोदय शाम को लगभग 6:52 बजे होगा।


अर्घ्य देने की विधि

1 मई 2026 की शाम को चंद्रमा निकलने के बाद चांदी या तांबे के लोटे में जल भरें। जल में थोड़ा कच्चा दूध, अक्षत (चावल), सफेद फूल और चंदन मिलाएं। 'ॐ सोम सोमाय नमः' या 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः' मंत्र का जाप करते हुए चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें।

बुद्ध पूर्णिमा पर 5 कार्यों का मिलता है महापुण्य

सुबह जल्दी उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर घर पर नहा रहे हैं, तो पानी में थोड़ा गंगाजल जरूर मिलाएं। स्नान के बाद ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन व कपड़े दान करें।

इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन श्रीविष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है।

पूर्णिमा की रात चंद्रमा को जल (अर्घ्य) देने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे मानसिक शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

इस दिन बोधि वृक्ष (बिहार के बोधगया में स्थित एक पवित्र पीपल का पेड़) या पीपल के पेड़ के पास दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है।

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