Chaitra Amavasya 2026: 18 या 19 कब है चैत्र अमावस्या? जानें किस दिन करेंगे पितरों की शांति के लिए तर्पण

Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम देखने को मिल रहा है। यह तिथि पितरों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। आइए जानें इस साल चैत्र अमावस्या किस दिन होगी और पितरों का तर्पण किस दिन किया जाएगा

अपडेटेड Mar 17, 2026 पर 7:29 PM
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हिंदू धर्म में चैत्र अमावस्या को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है।

Chaitra Amavasya 2026: हिंदू धर्म में चैत्र अमावस्या को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है। यूं तो ये तिथि पितरों की आत्मा की शांति और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन इसमें चैत्र अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन पितरों की शांति के लिए दान और तर्पण करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद मिलता है। इस साल चैत्र अमावस्या पर दर्श अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है। अमावस्या तिथि पर जब चंद्रमा पूरी तरह से अदृश्य हो जाते हैं तो उसे दर्श अमावस्या कहा जाता है। कहते हैं इस अमावस्‍या पर पितरों का तर्पण या श्राद्ध करने से जीवन में सुख-शांति आती है। लेकिन इस साल चैत्र अमावस्या की तिथि को लेकर लोगों भ्रम है, क्योंकि ये तिथि दो दिन पड़ रही है। आइए जानें चैत्र अमावस्या में स्नान-दान और तर्पण किस दिन होगा?

चैत्र अमावस्या तिथि

इस साल चैत्र अमावस्या की तिथि 18 मार्च सुबह 8:25 बजे से शुरू होकर 19 मार्च सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। इसी कारण अमावस्या का प्रभाव दोनों दिन माना जाएगा। हालांकि, धार्मिक दृष्टि से पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए 18 मार्च का दिन अधिक शुभ माना गया है, क्योंकि इस दिन दोपहर के समय अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी। 19 मार्च की सुबह अमावस्या समाप्त हो जाएगी।

दर्श अमावस्‍या पर क्‍या करते हैं

दर्श अमावस्या के दिन चंद्र देव की पूजा होती है और कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं। इस दिन चंद्र देव की प्रतिमा को सफेद फूल, चावल, चीनी और जल अर्पित करना चाहिए। साथ ही चंद्रमा के मंत्रों का जाप करना चाहिए। इससे मानसिक शांति मिलेगी।

साथ ही इस दिन पितरों का श्राद्ध-तर्पण करने का विशेष महत्व रखता है। दर्श अमावस्या पर जरूरतमंद लोगों को अन्‍न, वस्‍त्रों, अनाज या तिल का दान करना बेहद शुभ माना जाता है। ये दिन कालसर्प दोष, पितृ दोष और त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए भी उपयुक्‍त रहता है।


अमावस्या पर परिजनों को देखने आते हैं पितृ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितृलोक से पूर्वज अपने परिजनों को देखने पृथ्वी पर आते हैं। इसलिए ये तिथि पितरों को समर्पित है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों की शांति और आशीर्वाद के लिए तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं। माना जाता है कि इस दिन दिन किए गए दान और पूजा से पितृ दोष शांत होने की भी मान्यता है।

क्या करें 19 मार्च को?

19 मार्च की सुबह अमावस्या समाप्त हो जाएगी, इसलिए इस दिन सुबह-सुबह नदी स्नान करना शुभ होगा। इसके बाद से नवरात्रि का आरंभ हो जाएगा और माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा शुरू होगी।

दर्श अमावस्‍या पूजा विधि

  • इस दिन सुबह जल्‍दी उठें और फिर स्‍नान करके साफ वस्‍त्र पहनें।
  • इसके बाद व्रत का संकल्‍प लें।
  • फिर भगवान शिव या विष्‍णु जी की विधि विधान पूजा करें और फिर चंद्र देव की उपासना करें।
  • चंद्र देव को चावल, दूध या पुष्‍प जरूर अर्पित करें।
  • अमावस्या की कथा सुनें।
  • इस दिन फलाहारी व्रत रहें।

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