Chaitra Navratri 2025: नवरात्रि में बन रहे हैं 5 शुभ योग, जाने घटस्थापना का महत्व और पूजा के लाभ

Chaitra Navratri 2025: इस वर्ष नवरात्रि 30 मार्च से आरंभ होकर 6 अप्रैल तक श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाई जाएगी। खास बात यह है कि इस बार पांच शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे यह नवरात्रि अत्यंत मंगलकारी होगी। साथ ही, मां दुर्गा की हाथी पर सवारी समृद्धि और शुभ फल प्रदान करने का संकेत दे रही है

अपडेटेड Mar 29, 2025 पर 10:01 AM
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Chaitra Navaratri 2025: इस बार नवरात्रि 9 दिन की बजाय केवल 8 दिन की होगी।

इस साल चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 30 मार्च से होगा और 6 अप्रैल तक भक्तिभाव से मनाया जाएगा। इस बार नवरात्रि विशेष रहने वाली है, क्योंकि पांच दुर्लभ योगों का संयोग इसे और अधिक मंगलकारी बनाएगा। मां दुर्गा की सवारी हाथी होने से ये नवरात्रि सुख-समृद्धि और शुभता का संकेत दे रही है। हिंदू धर्म में नवरात्रि को शक्ति की आराधना और आत्मिक ऊर्जा जागृत करने का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इन पवित्र नौ दिनों में देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की उपासना से जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है।

भक्त व्रत, हवन और मंत्र जाप से मां दुर्गा को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। विशेष संयोगों के कारण इस बार की नवरात्रि और भी फलदायी होने वाली है, जिससे हर भक्त को मनचाही सिद्धि और सफलता मिलने की संभावना प्रबल होगी।

इस बार 8 दिनों की होगी नवरात्रि


इस बार नवरात्रि 9 दिन की बजाय केवल 8 दिन की होगी। पंचमी तिथि क्षय होने के कारण अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ रही हैं। 2 अप्रैल को चौथी और पंचमी की पूजा एक साथ संपन्न होगी।

घट स्थापना का शुभ मुहूर्त

प्रारंभिक मुहूर्त: सुबह 6:13 से 10:21 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:50 बजे तक

कलश स्थापना विधि: कैसे करें पूजा आरंभ?

1. पूजा स्थल को स्वच्छ करें और देवी-देवताओं का आह्वान करें।

2. मिट्टी के बर्तन में पवित्र मिट्टी डालकर उसमें ज्वारे (जौ के बीज) बोएं और हल्का पानी छिड़कें।

3. तांबे या मिट्टी के कलश में गंगाजल भरें और उसमें सुपारी, दूर्वा घास, अक्षत व सिक्का डालें।

4. कलश के ऊपर आम के 5 पत्ते रखें और लाल चुनरी में लपेटा नारियल स्थापित करें।

5. अब कलश को पूजा स्थल पर रखकर विधिपूर्वक नवरात्रि की पूजा शुरू करें।

6. नौ दिनों तक कलश और ज्वारे की विधिवत पूजा करें और सुबह-शाम जल अर्पित करें।

कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री

कलश, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, सुपारी, नारियल, लाल सूत्र, मौली, कपूर, रोली, अक्षत, लाल कपड़ा, फूल, चावल, लौंग, इलायची आदि।

मां दुर्गा की पूजन सामग्री

चावल, गंगा जल, चंदन, नारियल, गुलाल, जौ, 5 पान, सुपारी, श्रृंगार सामग्री, कमलगट्टा, फल और मिट्टी के बर्तन।

इस बार की चैत्र नवरात्रि न केवल शुभ संयोगों से भरपूर है, बल्कि देवी दुर्गा की कृपा से जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करने वाली भी होगी। भक्त पूरी श्रद्धा से मां की आराधना करें और आशीर्वाद प्राप्त करें।

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