Chaitra Navratri 2026 Day 6: आज चैत्र नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित, जानें कैसे करें पूजा, क्या है विधि और भोग?

Chaitra Navratri 2026 Day 6: आज चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है। नवरात्रि की षष्ठी तिथि मां दुर्गा के मां कात्यायनी स्वरूप को समर्पित है। इसलिए आज मां कात्यायनी की पूजा की जा रही है। माता कात्यायनी की पूजा गोधूलि बेला यानी सूर्यास्त के समय करना शुभ माना जाता है। आइए जानें इनकी पूजा की विधि

अपडेटेड Mar 24, 2026 पर 11:21 AM
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चैत्र नवरात्रि का छठा दिन मां दुर्गा के कात्यायनी रूप को समर्पित है।

Chaitra Navratri 2026 Day 6: हिंदू धर्म का प्रमुख और सबसे पवित्र चैत्र नवरात्रि का पर्व आस्था और विश्वास के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित है, जिसमें हर दिन मां के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाला ये वसंती नवरात्रि का ये पर्व नवमी तिथि को राम नवमी के साथ संपन्न होता है।

आज चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है, जो मां दुर्गा के कात्यायनी रूप को समर्पित है। आज के दिन मां दुर्गा के भक्त विधि-विधान से कात्यायनी स्वरूप की पूजा करते हैं। अपने कात्यायनी स्वरूप में माता शेर पर सवार हैं, उनके सिर पर मुकुट सुशोभित है और चार भुजाएं हैं। माना जाता है कि मां के इस स्वरूप की पूजा-अर्चना से विवाह में आ रही परेशानी दूर हो जाती है। मां कात्यायनी को पीला रंग प्रिय है। इसलिए आज की पूजा में पीले रंग के वस्त्र पहनने से माता प्रसन्न होती हैं। आइए जानें मां कात्यायनी की पूजा विधि और उनका प्रिय भोग क्या है?

धर्म ग्रथों में वर्णित है कि महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी भगवती ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया, इसलिए माता का नाम कात्यायनी पड़ा। माना जाता है कि मां कात्यायनी की उपासना से भक्तों को साहस, धर्म और विजय की प्राप्ति होती है।

मां कात्यायनी पूजा मुहूर्त

सुबह का शुभ समय : सुबह 06:21 से प्रातः 08:30 तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:03 PM से 12:52 PM तक (यह समय विशेष संकल्पों के लिए श्रेष्ठ है)


आरती का समय : शाम को सूर्यास्त के समय यानी लगभग शाम 06:30 के आसपास मां की आरती करना बहुत ही फलदायी होता है।

पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके पूजा शुरू करने से पहले साफ और संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • लाल रंग के आसन पर मां कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • सबसे पहले कलश देवता और गणेश जी का ध्यान करें।
  • फिर मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं।
  • इसके बाद फूल, अक्षत, रोली और धूप से पूजा करें।
  • मां को पीले फूल, पीली चूड़ियां और हल्दी की गांठें अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
  • शहद, पान और मिठाई का भोग लगाएं।
  • पूजा के बाद पूरी श्रद्धा से आरती करें और भगवान का आभार व्यक्त करें।

मां कात्यायनी का प्रिय भोग

इस दिन मां कात्यायनी की पूजा में उनका प्रिय भोग भी अर्पित करना चाहिए। मां कात्यायनी का प्रिय भोग शहद और शहद से बने व्यंजन हैं। आज के दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा उन्हें हलवा-पूरी का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। शहद प्राकृतिक मिठास और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। जबकि, हलवा और पूरी का भोग समृद्धि और संतोष का संकेत देती है। शहद युक्त पान का भोग भी देवी कात्यायिनी को लगता है।

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