Chaitra Navratri 2026 Story: आज से शुरू हुई चैत्र नवरात्रि, जानें इसकी पौराणिक कथा और कैसे हुई इसकी शुरुआत?

Chaitra Navratri 2026 Story: चैत्र नवरात्रि का पर्व आज से शुरू हो चुका है। ये चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नवमी तिथि तक मनाया जाता है। आइए जानें मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित इस पर्व की शुरुआत कैसे हुई और इससे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं क्या हैं?

अपडेटेड Mar 19, 2026 पर 11:25 AM
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चैत्र नवरात्रि का पर्व हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है।

Chaitra Navratri 2026 Story: चैत्र नवरात्रि का पर्व हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है और नौ दिनों तक चलता है। इस पर्व में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और उनसे खुशहाली, संपन्नता और सकारात्मकता की कामना करते हैं। माता के बहुत से भक्त नौ दिनों का उपवास करते हैं और नवमी तिथि को व्रत का पारण करते हैं। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना करते हैं और अखंड ज्योत जलाते हैं। माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार पर देवी मां की कृपा भी बरसती है। आइए जानते हैं आज से शुरू हुए चैत्र नवरात्रि की शुरुआत कैसे हुई और इसकी पौराणिक कथा क्या है?

महिषासुर का अंत करने को मां ने लिया अवतार

पौराणिक कथा के अनुसार अनुसार, महिषासुर नामक राक्षस को वरदान था कि उसे कोई देव या दानव नहीं हरा पाएगा। उसका आतंक पृथ्वी पर बढ़ता जा रहा था। महिषासुर के आतंक से देवता, मनुष्य और समस्त सृष्टि त्राहि-त्राहि कर रही थी। इसके बाद सभी देवताओं ने माता पार्वती से उनकी रक्षा के लिए प्रार्थना किया। तब देवी पार्वती ने अपने अंश से नौ रूप प्रकट किए, जिन्हें देवताओं ने अपने शस्त्र देकर शक्ति संपन्न किया। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ये पूरी प्रक्रिया चैत्र माह के प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर पूरे 9 दिनों तक चला था। इसके बाद से चैत्र महीने में नवरात्रि मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई। चैत्र नवरात्रि आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति करने वाली मानी जाती है।

हिंदू वर्ष में आते हैं 4 नवरात्रि

पुराणों में एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ के महीनों में कुल मिलाकर चार बार नवरात्रों का जिक्र किया गया है, लेकिन चैत्र और अश्विन महीने के नवरात्रों को ही प्रमुखता से मनाया जाता है। बाकी दो नवरात्रों को तंत्र-मंत्र की साधना हेतु करने का विधान है, इसलिए इनका आम लोगों के जीवन में कोई महत्व नहीं है।

नौ देवियों को समर्पित हैं नौ दिन


महाशक्ति की आराधना का पर्व नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों- पहला-शैलपुत्री, दूसरा-ब्रह्मचारिणी, तीसरा- चंद्रघंटा, चौथा-कूष्मांडा, पांचवां- स्कंदमाता, छठा-कात्यायनी, सातवां-कालरात्रि, आठवां-महागौरी और नौवां-सिद्धिदात्री देवी की पूजा-अर्चना की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा की संज्ञा दी गई है। नवरात्र के आखिरी दिन कन्याओं को भोजन कराया जाता है।

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