Chaitra Purnima 2026: हिंदू कैलेंडर की पहली पूर्णिमा तिथि होने के नाते चैत्र पूर्णिमा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्णिमा तिथि मां लक्ष्मी को समर्पित होती है। साथ ही, चंद्र दोष की शांति के लिए इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। यह तिथि भगवान सत्यनारायण की कथा के लिए भी उत्तम मानी जाती है। पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं, जिनमें हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र पूर्णिमा पहली होती है। इसे चैती पूनम के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन इस साल चैत्र पूर्णिमा की तिथि को लेकर भक्तों में असमंजस है, क्योंकि पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 01 और 02 अप्रैल दोनों दिन लग रही है। ऐसे में व्रत, सत्यनारायण की कथा, चंद्रमा को अर्घ्य और स्नान-दान की सही तिथि जानना जरूरी है। आइए जानते हैं, पंचांग के अनुसार क्या करना चाहिए ?
द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने की पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और पूर्णिमा तिथि का समापन 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर होगा।
आज है चैत्र पूर्णिमा का व्रत
1 अप्रैल से पूर्णिमा तिथि लग जाएगी और पूरे दिन रहेगी। ऐसे में 1 अप्रैल को पूर्णिमा का व्रत रख सकते हैं और इसी दिन चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं।
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और व्रत के लिए उदयातिथि को अधिक मान्यता दी जाती है। इसलिए चैत्र पूर्णिमा गुरुवार 2 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। ऐसे में पूर्णिमा तिथि का स्नान-दान 2 अप्रैल को करना उचित रहेगा। स्नान-दान के लिए उदयातिथि को मान्यता दी गई है।
चंद्रदेव पूजा और अर्घ्य का समय
मान्यता है कि, पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव की पूजा करने से जीवन के पाप नष्ट होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 1 अप्रैल को चंद्रदोय का समय शाम 06:06 बजे रहेगा।
स्नान, दान, पूजा और व्रत का मुहूर्त
चैत्र पूर्णिमा का पवित्र स्नान गुरुवार 2 अप्रैल 2026 को किया जाएगा। स्नान-दान के लिए 2 अप्रैल सुबह 4:38 से सुबह 5:24 तक का समय सबसे उत्तम रहेगा। अगर इस समय में स्नान-दान न कर पाएं तो सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक जरूर कर लें।
सत्यनारायण पूजा का मुहूर्त
पूर्णिमा के दिन कई लोग सत्यनारायण भगवान की पूजा भी करते हैं। चैत्र पूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजा के लिए सुबह 06 बजकर 11 मिनट से सुबह 09 बजकर 18 मिनट तक का समय रहेगा।
चैत्र पूर्णिमा शुभ मुहूर्त 2026
चैत्र पूर्णिमा पर शुभ योग
चैत्र पूर्णिमा पर इस बार चार शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन सभी कार्य सिद्ध करने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग, सभी दोष नष्ट करने वाला रवि योग, हर कार्य में वृद्धि देने वाला वृद्धि योग और ध्रुव नामक शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। इन शुभ योग में भगवान सत्यनारायण की पूजा अर्चना करने से हर कष्ट से मुक्ति मिलती है और सभी सुखों की प्राप्ति होती है।