Guru Pradosh Vrat 2026: सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग में गुरु प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा विधि और मुहूर्त

Guru Pradosh Vrat 2026: आज ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदयशी तिथि है, इसलिए आज ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत किया जा रहा है। त्रयोदशी तिथि गुरुवार के दिन पड़ने की वजह से इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। इस व्रत में सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग बन रहे हैं। आइए जानें

अपडेटेड May 14, 2026 पर 11:18 AM
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आज ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि गुरुवार के दिन पड़ी है। इसलिए आज गुरु प्रदोष व्रत है।

Guru Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस तरह ये व्रत पूरे साल में 24 बार किया जाता है। खास बात यह है कि त्रयोदशी तिथि जिस दिन पड़ती है, उसके आधार पर इस व्रत का नाम तय होता है। जैसे आज ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो गुरुवार के दिन पड़ी है। इसलिए इस व्रत का नाम गुरु प्रदोष व्रत है।

यह तिथि देवों के देव महादेव को समर्पित है और इसमें महादेव के साथ माता पार्वती की पूजा शाम को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव के साथ-साथ देवगुरु बृहस्पति की भी कृपा प्राप्त होती है। किसी की कुंडली में अगर गुरु ग्रह कमजोर है, तो इस व्रत को करने से यह ग्रह मजबूत होता है। इस साल इस व्रत में सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

गुरु प्रदोष व्रत तारीख

ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 14 मई को सुबह 11 बजकर 21 मिनट पर होगी और 15 मई को सुबह 8 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो जाएगी।

प्रदोष व्रत पूजा का शुभ समय

गुरु प्रदोष व्रत पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त की शुरुआत शाम 7 बजे से होगी और रात 9 बजे तक रहेगी।


गुरु प्रदोष व्रत पर बन रहे दो शुभ संयोग

इस बार गुरु प्रदोष व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा हैं, जिससे इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

प्रदोष व्रत का महत्व

शिव कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत को शिव पुराण में सबसे महत्वपूर्ण व्रत बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में विराजमान रहते हैं। इस समय पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

गुरु प्रदोष व्रत का लाभ

गुरु प्रदोष व्रत विशेष रूप से विवाह, संतान सुख, आर्थिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए लाभकारी माना जाता है। इस व्रत को करने से कुंडली में बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है।

गुरु प्रदोष व्रत 2026 पूजा विधि

सुबह स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजाघर में दीप जलाएं और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद प्रदोष काल में फिर से शुद्ध होकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। पूजा के लिए शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।

गुरु प्रदोष व्रत उपाय

गुरु प्रदोष व्रत के दिन शिव मंदिर में दीपदान करना, जरूरमंदों और गरीबों को भोजन कराना और पीली चीजों का दान करना शुभ फलदायी होता है।

May Pradosh Vart 2026: ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा विधि, मुहूर्त और गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

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