Chhath Puja Kharna Vidhi: छठ पूजा के दूसरे दिन होगा खरना, जानिए महत्व और विधि

Chhath Puja Kharna Vidhi: छठ पूजा का पावन पर्व आज नहाय-खाय के साथ शुरू हो चुका है और कल यानी दूसरे दिन खरना हो। इसमें व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास करते हैं और एक समय बिना नमक का भोजन करते हैं। इसके बाद से उनका 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है। आइए जानें इसकी विधि

अपडेटेड Oct 25, 2025 पर 5:59 PM
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खरना के दिन उनका भोजन निर्जल व्रत का आधार होता है।

Chhath Puja Kharna Vidhi: चार दिनों का महापर्व छठ आज से शुरू हो गया है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आज नहाय-खाय की विधि की गई। छठ महापर्व के दूसरे दिन यानी पंचमी तिथि को खरना होगा। छठ पूजा का ये सबसे अहम दिन होता है। इस दिन व्रत पूरे दिन निर्जला उपवास करते हैं और एक समय का बिना नमक का भोजन करते हैं। इस दिन का भोजन व्रतियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसके बाद से उनका 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। इसलिए, खरना के दिन उनका भोजन निर्जल व्रत का आधार होता है। खरना के दिन व्रती अगले दिन सूर्य षष्ठी की तैयारी करते हैं। यह छठ पर्व का छठ पूजा के मुख्य दिन होता है और इस दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। आइए जानें खरना की विधि और महत्व

खरना का महत्व

खरना को छठ व्रत का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसे करने के बाद 36 घंटे के व्रत की शुरुआत होती है। यह दिन आत्मिक और शारीरिक शुद्धता के लिए भी बेहद अहम माना जाता है। व्रती इस दिन कर्म, मन और विचारों से शुद्ध होते हैं और अगले 36 घंटे के निर्जला व्रत के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार होते हैं। यह दिन सामाजिक सौहार्द्र का भी संदेश देता है। इस दिन बना प्रसाद को परिवार और पड़ोसियों के साथ भी बांटा जाता है।

खरना पूजा विधि

  • खरना में पूरे दिन व्रत रखने के बाद व्रती शाम को पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद अगले 36 घंटों तक निर्जला व्रत रखा जाता है। इस दिन नीचे दी गई विधि से आपको व्रत का पालन करना चाहिए।
  • व्रती खरना के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करते हैं। इसके बाद छठी माता और सूर्य देव का ध्यान करते हुए पूरे दिन भर निर्जला व्रत का संकल्प लेते हैं।
  • खरना की मुख्य पूजा शाम के समय होती है इसलिए शाम की पूजा से पहले व्रती पूजा में इस्तेमाल होने वाली चीजों को साफ करते हैं और पूजा स्थल की भी साफ-सफाई करते।
  • शाम को प्रसाद बनाने के लिए अगर आप मिट्टी का चूल्हा और मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करें तो इसे शुभ माना जाता है।
  • शाम को सूर्यास्त के बाद व्रती खुद प्रसाद बनाते हैं। इस दिन प्रसाद में गुड़ या फिर दूध और चावल की खीर बनाई जाती है। प्रसाद के रूप में गेहूं के आटे की रोटी, पूड़ी और केला भी शामिल कर सकते हैं।
  • छठ पर्व पवित्रता का प्रतीक भी है, इसलिए खरना वाले दिन व्रत का संकल्प लेने के बाद पूरे दिन शुद्धता का पालन करते हैं। नकारात्मक विचारों से दूर रहने के लिए धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन कर सकते हैं।
  • प्रसाद तैयार होने के बाद छठी माता और सूर्य देव की पूजा करते हैं। पूजा के दौरान नीचे दिए गए मंत्रों का जप और छठी माता की पूजा कर सकते हैं।


ॐ ह्रीं षष्ठीदेव्यै स्वाहा

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः

ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते। अनुकंपय मां भक्त्या गृहाणार्ध्य दिवाकर:।।

  • केले के पत्ते पर खीर, पूड़ी आदि छठी मैय्या और सूर्य देव का ध्यान कर उन्हें अर्पित करते हैं। पूजा संपन्न होने के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि व्रत का प्रसाद किसी एकांत स्थान पर बैठकर करें। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत हो जाती है।

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