Ekadashi Shradh 2025: पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से शुरू होने वाला पितृ पक्ष अश्विन मास की अमावस्या तिथि तक चलता है। इसमें तिथि के अनुसार अपने पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। इसमें एकादशी तिथि के दिन देह त्यागने वाले पितरों का श्राद्ध इसी तिथि पर किया जाता है। इसके अलावा इसमें संन्यासियों का भी श्राद्ध करने का विधान है। इस साल पितृ पक्ष की एकादशी तिथि का श्राद्ध 17 सितंबर के दिन किया जाएगा। पितृ पक्ष की शुरुआत 07 सितंबर को भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि के साथ हुई थी और इसका समापन 21 सितंबर को अश्विन अमावस्या के दिन सर्व पितृ विसर्जन के साथ होगा।
पितृ पक्ष के ये नियम ध्यान रखें
पितृ पक्ष के कुछ विशेष नियम हैं, जिनका हर किसी को ध्यान रखना चाहिए। ये साल का विशेष समय होता है, जिसमें साफ-सफाई ही नहीं कुछ नियमों को मानना जरूरी होता है। इस अवधि में मास-मंदिरा से दूर रहना चाहिए और सात्विक भोजन करना चाहिए। साथ ही इस दौरान सत्तू भी नहीं खाते हैं। ब्राह्मणों को भोजन करवाते समय खाने के बर्तन को दोनों हाथ से पकड़ें औप भोजन करवाते समय मौन रहें। हमेशा ध्यान रखें अपने सामर्थ्य के अनुसार ही श्राद्ध करें, कभी कर्ज लेकर श्राद्ध न करें। पितृ पक्ष में सुबह शाम दो समय स्नान करके पितरों को याद जरूर करें।
पितृ पक्ष की एकादशी तिथि 17 सितंबर को देर रात 12.21 बजे शुरू हो रही है और 17 सितंबर , 2025 को रात 11.39 बजे इसका समापन होगा। ऐसे में एकादशी श्राद्ध बुधवार, 17 सितंबर को ही किया जाएगा। इस दिन श्राद्ध का मुहूर्त
रौहिण मूहूर्त : दोपहर 12.40 बजे से दोपहर 1.29 बजे तक
अपराह्न काल : दोपहर 1.29 बजे से दोपहर 3.56 बजे तक
एकादशी श्राद्ध के दिन सुबह स्नान करें। घर पर ही स्नान कर रहे हैं, तो पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और ब्रहाणों की सहायता से पितरों का तर्पण व पिंडदान करें। ब्रहाणों को भोजन करवाने के बाद श्रद्धानुसार दान-दक्षिणा देकर विदा करें। इसके साथ ही पंचबलि यानी गाय, कुत्ते, कौवे, देव और चींटी के लिए भी भोजन जरूर निकालें। आप एकादशी श्राद्ध के दिन काले तिल, चावल और दूध आदि का भी दान कर सकते हैं।