Gangaur Vrat 2026: इस दिन रखा जाएगा गणगौर का व्रत, जानें सही तारीख, विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Gangaur Vrat 2026: गणगौर का व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत में महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। अविवाहित लड़कियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए यह व्रत रखती हैं

अपडेटेड Mar 19, 2026 पर 6:57 PM
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गणगौर के व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

Gangaur Vrat 2026: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर का व्रत किया जाता है। इस दिन जहां विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं ये व्रत मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए करती हैं। गणगौर का पर्व राजस्थान, हरियाणा और उत्तर भारत के कई राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाएं पूरे दिन व्रत करती हैं और पारंपरिक तरीके से श्रद्धा और आस्था के साथ शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।

माना जाता है भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने भी गणगौर का व्रत किया था। तभी से गणगौर का व्रत करने की परंपरा चली आ रही है। आइए जानें इस साल गणगौर का व्रत किस दिन किया जाएगा और इसकी पूजा विधि क्या होगी, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है?

गणगौर व्रत की तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 21 मार्च को सुबह 2 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी और उसी दिन रात 11 बजकर 56 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इसलिए इस वर्ष गणगौर व्रत 21 मार्च 2026 को रखा जाएगा।

गणगौर व्रत का शुभ मुहूर्त

सूर्योदय : सुबह 6 बजकर 24 मिनट


ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4 बजकर 49 मिनट से 5 बजकर 36 मिनट तक

अभिजित मुहूर्त : दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक

सायं संध्या : शाम 6 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक

पूजा का शुभ समय : सुबह 7 बजकर 55 मिनट से सुबह 9 बजकर 26 मिनट तक

गणगौर व्रत पूजा विधि

  • लकड़ी की एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर शिव-पार्वती की मिट्टी की बनी प्रतिमाएं स्थापित करें।
  • माता पार्वती को सोलह शृंगार की वस्तुएं जैसे मेहंदी, चूड़ियां, सिंदूर और बिंदी अर्पित करें। भगवान शिव को पीले वस्त्र और अक्षत चढ़ाएं।
  • नवरात्र के समय बोए गए जवारे इस पूजा में विशेष रूप से उपयोग किए जाते हैं। माता को फल, मिठाई और घेवर का भोग लगाएं।
  • पूजा के दौरान गणगौर व्रत की पौराणिक कथा सुनें या पढ़ें।
  • शाम के समय महिलाएं गाते-बजाते हुए किसी पवित्र नदी पर जाकर प्रतिमा का विसर्जन करती हैं।

सुखी दांपत्य और मनचाहे जीवनसाथी के लिए व्रत

गणगौर के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस पूजा से दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और खुशियां बढ़ती हैं। वहीं अविवाहित लड़कियां इस व्रत को अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए करती हैं। यह भी विश्वास है कि जो महिलाएं श्रद्धा से यह व्रत रखती हैं, उनके घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

गणगौर व्रत में किन बातों का रखें ध्यान

गणगौर व्रत के दिन सोना उचित नहीं माना जाता, इसलिए पूरे दिन भक्ति और पूजा में मन लगाना चाहिए। इस दिन किसी भी तरह के अपशब्द बोलने से बचना चाहिए। साथ ही, इस दिन तामसिक भोजन करने से भी परहेज करना चाहिए।

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