Govardhan Puja 2025: 22 अक्टूबर को होगी गोवर्धन पूजा, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

Govardhan Puja 2025: इस साल गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर के दिन की जाएगी। इसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। वैसे तो गोवर्धन पूजा देश के कई हिस्सों में होती है लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी ब्रज क्षेत्र में यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाता है। जानिए गोवर्धन पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त

अपडेटेड Oct 17, 2025 पर 12:00 AM
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उदयातिथि के अनुसार इस साल गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को होगी।

Govardhan Puja 2025: गोवर्धन पूजा, दिवाली के पांच दिवसीय त्योहार का अभिन्न अंग है। यह त्योहार दीपावली के अगले दिन यानी बलिप्रतिपदा को मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की बेहद लोकप्रिय लीला की याद में मनाए जाने वाले इस पर्व में श्री कृष्ण और गोवर्धन पर्वत के प्रतीक की पूजा की जाती है। यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाते हैं और गाय के गोबर का गोवर्धन पर्वत बनाकर विधि-विधान से उसकी पूजा करते हैं।

इस साल दिवाली सहित कई त्योहारों की सही तारीख को लेकर लोगों में काफी भ्रम है। पंचांग के अनुसार, इस साल ये पूजा 22 अक्टूबर के दिन की जाएगी। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। वैसे तो गोवर्धन पूजा देश के कई हिस्सों में होती है लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी ब्रज क्षेत्र में यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाता है। आइए जानते हैं गोवर्धन पूजा की तिथि कबसे लग रही है और इसकी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या होगा?

कब से लग रही कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा?

वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 21 अक्टूबर को शाम 5:54 बजे शुरू होगी और इसका समापन 22 अक्टूबर को रात 8:16 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार इस साल गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को होगी, जबकि दिवली का त्योहार इस साल 20 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यानि इस बार गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन न होकर एक दिन बाद होगी।

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त

गोवर्धन पूजा यानि अन्नकूट के दिन पूजा के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं। जो लोग सुबह के समय गोवर्धन पूजा करते हैं वह सुबह 06:26 बजे से सुबह 8:42 बजे तक रहेगा। वहीं शाम के समय पूजा का शुभ मुहूर्त 03:29 बजे से शाम 05:44 बजे तक रहेगा।


गाय के गोबर से बनाते हैं गोवर्धन का चित्र

गोवर्धन पूजा के दिन घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन का चित्र बनाया जाता है। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य उसकी 7 बार परिक्रमा लगाते हैं और खील-बताशे का भोग लगाते हैं। प्रसाद वितरण के बाद भगवान श्रीकृष्ण के भजन गाए जाते हैं। अगले दिन सुबह इस प्रतिमा को हटा दिया जाता है। फिर उसी स्थान पर आटे से चौक बनाया जाता है और इस गोबर के 5 उपले बनाए जाते हैं जो कि बाद में पूजा-पाठ में उपयोग किए जाते हैं।

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