Hal Chhat 2026 Vrat Katha: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल छठ का व्रत रखा जाता है। इसे ललही छठ, हरछठ या बलराम जयंती भी कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की दीर्घायु, आरोग्य और सुखी जीवन की कामना के लिए माताएं रखती हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था, जिनका मुख्य शस्त्र 'हल' है। इसलिए इसका नाम हल छठ पड़ा। इस व्रत में हल से जोते गए खेत का कोई भी अनाज या फल नहीं खाया जाता। केवल पसही के चावल (तिन्नी का चावल), महुआ और बिना जुते उगे साग-सब्जियों का ही सेवन होता है। इस दिन गाय के दूध, दही या घी का उपयोग नहीं किया जाता; केवल भैंस के दूध का ही प्रयोग होता है। हल छठ के व्रत में दूध बेचने वाली ग्वालिन की व्रत कथा सुनना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
