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Hal Chhat 2026 Vrat Katha: कल होगा कृष्ण के बड़े भाई दाऊ का जन्म, इस व्रत में जरूर सुनें दूध बेचने वाली ग्वालिन की व्रत कथा

Hal Chhat 2026 Vrat Katha: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल छठ का व्रत किया जाएगा। माना जाता है कि इस दिन भगवार कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। इस साल यह व्रत कल किया जाएगा। इस दिन दूध बेचने वाली ग्वालिन की व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 01, 2026 पर 9:11 PM
Hal Chhat 2026 Vrat Katha: कल होगा कृष्ण के बड़े भाई दाऊ का जन्म, इस व्रत में जरूर सुनें दूध बेचने वाली ग्वालिन की व्रत कथा
इस व्रत में हल से जोते गए खेत का कोई भी अनाज या फल नहीं खाया जाता।

Hal Chhat 2026 Vrat Katha: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल छठ का व्रत रखा जाता है। इसे ललही छठ, हरछठ या बलराम जयंती भी कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की दीर्घायु, आरोग्य और सुखी जीवन की कामना के लिए माताएं रखती हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था, जिनका मुख्य शस्त्र 'हल' है। इसलिए इसका नाम हल छठ पड़ा। इस व्रत में हल से जोते गए खेत का कोई भी अनाज या फल नहीं खाया जाता। केवल पसही के चावल (तिन्नी का चावल), महुआ और बिना जुते उगे साग-सब्जियों का ही सेवन होता है। इस दिन गाय के दूध, दही या घी का उपयोग नहीं किया जाता; केवल भैंस के दूध का ही प्रयोग होता है। हल छठ के व्रत में दूध बेचने वाली ग्वालिन की व्रत कथा सुनना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

हलछठ व्रत 2026 की तारीख

इस साल भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि 2 सितंबर को लग रही है, इसलिए इस दिन ही व्रत किया जाएगा। छठ तिथि दो सितंबर की सुबह 06:12 बजे से लेकर तीन सितंबर की सुबह 04:25 बजे तक रहेगी, हालांकि इसमें उदयातिथि का मान नहीं है, पूरे दिन तिथि 2 सितंबर को मिल रही है।

हल छठ 2026: दूध बेचने वाली ग्वालिन की पौराणिक कथा

प्राचीनकाल में एक गर्भवती ग्वालिन थी। हल छठ का दिन था और उसका प्रसवकाल निकट था। वह दूध-दही बेचने के लिए घर से निकली, लेकिन रास्ते में ही उसे तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। वह एक महुए के पेड़ के नीचे बैठ गई और वहीं उसने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया। संतान को जन्म देने के बाद ग्वालिन को चिंता हुई कि दूध बेचने में देरी हो गई तो उसका दूध खराब हो जाएगा या ग्राहक चले जाएंगे। उसने नवजात शिशु को महुए की झाड़ियों में छिपाकर सुरक्षित रख दिया और स्वयं दूध बेचने चली गई।

उस दिन हल छठ का व्रत होने के कारण गांव की महिलाएं गाय या भैंस का शुद्ध दूध-दही ही लेना चाहती थीं। ग्वालिन ने लालच में आकर अपने दूध में तालाब का पानी मिला दिया और गांव वालों को झूठ बोलकर बेच दिया कि यह शुद्ध दूध है। जब वह दूध बेचकर वापस महुए के पेड़ के पास पहुंची, तो उसने देखा कि एक किसान खेत जोतने के लिए हल लेकर वहीं से गुजरा था और उसके हल की नोक से बच्चे का पेट चिर गया था। बच्चा लहु-लुहान पड़ा था। यह देखकर ग्वालिन रोने-बिलखने लगी और उसे तुरंत अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने समझा कि उसने हल छठ के पावन दिन गांव की व्रती महिलाओं से झूठ बोलकर अशुद्ध/मिलावटी दूध बेचा था, उसी पाप की सजा उसकी मासूम संतान को मिली है।

उसने बिना देर किए गांव की महिलाओं के पास वापस जाकर सच-सच बता दिया और अपने पाप का पश्चाताप किया तथा सभी से क्षमा मांगी। ग्वालिन के सत्य बोलने, सच्चे मन से प्रायश्चित करने और हल छठ माता से प्रार्थना करने पर बलराम जी और छठ माता की कृपा हुई। जब वह वापस पेड़ के पास पहुंची, तो उसने देखा कि उसका बच्चा पूरी तरह से जीवित और स्वस्थ खेल रहा था। तभी से यह मान्यता है कि जो भी माता हल छठ का व्रत पूरी निष्ठा और सत्यता के साथ रखती है, माता उसके बच्चों की हर संकट से रक्षा करती हैं।

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