Hariyali Teej 2025: कल बन रहे इन दुर्लभ संयोगों से खास हुआ श्रावणी तीज का त्योहार

Hariyali Teej 2025: महिलाएं कल यानी रविवार, 27 जुलाई को हरियाली तीज या श्रावणी तीज का त्योहार धूमधाम से मनाएंगी। भगवान शिव और मां पार्वती के मिलन के प्रतीक इस त्योहार पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जिसकी वजह से ये और भी खास हो गया है।

अपडेटेड Jul 26, 2025 पर 10:18 PM
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हिंदू धर्म में हरियाली तीज का त्योहार महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान शिव और मां पार्वती के मिलन के प्रतीक है। इस दिन शादीशुदा और अविवाहित महिलाएं शिव-पार्वती से सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद मांगती हैं। इस बार ये पर्व कल यानी रविवार, 27 जुलाई 2025 को मनाया जाएगा।

इस बार का त्योहार बेहद खास है, क्योंकि इस बार दो ऐसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं जो कई वर्षों में होते हैं। पंचांग के अनुसार इस बार हरियाली तीज के मौके पर ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी है कि दो दुर्लभ संयोग बन रहे हैं गजलक्ष्मी राजयोग और बुधादित्य राजयोग। इन शुभ योगों के चलते हरियाली तीज पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। इनके अलावा इस दिन वरियान, परिघ और छत्र नाम के 3 अन्य शुभ योग भी रहेंगे। आइए जानें हरियाली तीज की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और इनका समय।

हरियाली तीज 2025 शुभ योग

हरियाली तीज के दिन गुरु और शुक्र मिथुन राशि में रहेंगे, जिससे गजलक्ष्मी राजयोग बनेगा। वहीं, कर्क राशि में सूर्य और बुध की युति होने से बुधादित्य नाम का राजयोग भी बनेगा। इन शुभ योगों का निर्माण होने की वजह से हरियाली तीज के पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। इनके अलावा इस दिन वरियान, परिघ और छत्र नाम के 3 अन्य शुभ योग भी रहेंगे।

चंद्रमा और मंगल की यह युति मिलकर गजलक्ष्मी राजयोग का निर्माण कर रही है। 26 जुलाई 2025 को दोपहर 3.51 बजे चंद्रमा का गोचर सिंह राशि में होगा, जहां पहले से स्थित मंगल ग्रह के साथ उसकी युति से गजलक्ष्मी राजयोग का निर्माण होगा। हरियाली तीज जैसे सौभाग्यशाली व्रत पर गजलक्ष्मी योग बनना बहुत शुभ होता है। इसे धन, समृद्धि और शुभ फल देने वाला योग माना जाता है।

इस समय लगेगी तृतीया तिथि


पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 26 जुलाई को रात 10.41 बजे शुरू होगी। यह 27 जुलाई को रात 10.41 तक रहेगी।

पूजा विधि

शुभ मुहूर्त में साफ जगह पर शिव-पार्वती की तस्वीर या मूर्ति स्थापित कर फूल-माला पहनाएं। कुंकुम से तिलक करें और दीपक जलाएं। पूजा में सुहाग का सामान चढ़ाएं। इसके साथ ही बेलपत्र, धतूरा आदि भी अर्पित करें। साथ में ‘ऊं नम: शिवाय’ पंचाक्षरी मंत्र का जाप करते रहें। भगवान शिव को सफेद वस्त्र चढ़ाएं और आरती के साथ पूजा संपन्न करें।

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