Hindu Nav Varsh 2026: शुरू होने वाला हिंदू नव वर्ष, जानें तारीख और क्यों इस बार होगा 12 की जगह 13 महीनों का साल?

Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर से अलग होता है। इसकी शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से मानी जाती है। इस साल हिंदू वर्ष में 12 की जगह 13 महीने होंगे। आइए जानें कब से शुरू हो रहा है हिंदू नव वर्ष और क्यों इस बार 13 महीनों का होगा हिंदू वर्ष

अपडेटेड Feb 13, 2026 पर 10:06 PM
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हिंदू नववर्ष के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल रहेंगे।

Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू धर्म को मानने वाले लोग हिंदू वर्ष के आधार पर त्योहार, व्रत और शादी, मुंडन और गृह प्रवेश आदि शुभ काम करते हैं। हिंदू वर्ष चंद्र मास के आधार पर चलता है, जिसमें 15 दिनों के दो पक्ष होते हैं। हिंदू वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर से अलग होता है। इसका पहला महीना चैत्र होता है और अंतिम महीना फाल्गुन होता है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए संवत्सर की शुरुआत होती है। इस वर्ष 'रौद्र' नामक संवत्सर प्रारंभ हो रहा है। हिंदू नववर्ष के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल रहेंगे। 19 मार्च 2026 से शुरू हो रहे इस संवत्सर में 12 नहीं इस बार 13 माह रहेंगे। इसमें ज्येष्ठ मास दो बार आएगा। इस अतिरिक्त महीने को लोकभाषा में 'मलमास', 'पुरुषोत्तम मास' या 'अधिक मास' कहा जाता है।

इस दिन से शुरू होगा हिंदू नव वर्ष

वैदिक कैलेंडर के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च, 2026 को सुबह 6:45 बजे शुरू होगी और अगली सुबह तक रहेगी। 19 मार्च के दिन विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होगी।

हिंदू नव वर्ष का पहला पर्व होता है चैत्र नवरात्रि

मां दुर्गा की पूजा के नौ दिनों यानी चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हिंदू नव वर्ष से ही होती है। चैत्र नवरात्रि में भी नौ दिन लोग देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं। पूरे भारत में, लोग इस त्योहार को अलग-अलग नामों से मनाते हैं, महाराष्ट्र में गुडी पड़वा, कर्नाटक और आंध्र में उगादी, सिंधियों के लिए चेटी चंद और उत्तर भारत में चैत्र नवरात्रि।


13 महीनों का होगा विक्रम संवत 2083

हिंदू पंचांग चंद्रमा की चाल पर आधारित होता है। चंद्र वर्ष करीब 354 दिन का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिन का होता है। इन दोनों में लगभग 11 दिनों का अंतर आता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीन साल में एक अधिकमास जोड़ा जाता है। साल 2026 में यही संतुलन ज्येष्ठ माह में बनेगा, इसलिए इस साल दो ज्येष्ठ महीने होंगे। ज्योतिषियों के अनुसार अधिकमास 17 मई से 15 जून 2026 के बीच रहेगा। इसके कारण आने वाले व्रत और त्योहार लगभग 15 से 20 दिन आगे बढ़ जाएंगे।

अधिकमास का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब यह अतिरिक्त महीना बना तो कोई देवता इसका स्वामी नहीं बनना चाहता था। तब भगवान विष्णु ने इसे अपनाया और इसे नाम मिला पुरुषोत्तम मास। इसलिए इस महीने को भक्ति, जप, दान और साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

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