Hindu New year Kundli Prediction: शुरू हो चुका है हिंदू नववर्ष, जानें भारत के लिए क्या संकेत दे रही है इसकी कुंडली?

Hindu New year Kundli Prediction: हिंदू नववर्ष की शुरुआत हो चुकी है। ये वर्ष विक्रम संवत 2083 है और इसके राजा बृहस्पति हैं, जबकि मंत्री मंगल हैं। हिंदू कैलेंडर के इस वर्ष को रौद्र संवत कहा जा रहा है। आइए जानें इस संवत की कुंडली भारत के लिए क्या संकेत दे रही है

अपडेटेड Mar 21, 2026 पर 4:55 PM
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इस संवत को लेकर ज्योतिषी कई मामलों में चिंता जाहिर कर रहे हैं।

Hindu New year Kundli Prediction: हिंदू धर्म के सभी व्रत और त्योहार हिंदू वर्ष के अनुसार मनाए जाते हैं, जो चंद्र तिथियों पर आधारित होता है। यह अंग्रेजी कैलेंडर से बिलकुल अलग होता है और इसी शुरुआत 01 जनवरी से न होकर हिंदू मास चैत्र के शुक्ल पक्ष की प्रति पदा से होती है। इस समय चल रहे चैत्र मास के शुक्ल प्रतिपदा से विक्रम संवत 2083 शुरू हो चुका है। नए संवत को रौद्र संवत कहा जा रहा है, जिसके राजा देवगुरु बृहस्पति हैं और मंत्री मंगल हैं। इस संवत को लेकर ज्योतिषी कई मामलों में चिंता जाहिर कर रहे हैं। इनके अनुसार हर साल चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को जब सूर्य और चन्द्रमा की मीन राशि में सामान अंशों पर युति होती है तो उस समय बनने वाली कुंडली को 'हिन्दू नववर्ष' की कुंडली कहा जाता है। आइए जानें इस वर्ष की कुंडली भारत के लिए क्या संकेत दे रही है?

राजा बृहस्पति और मंत्री का भारत पर प्रभाव ?

वर्ष के राजा गुरु होने से इस वर्ष अच्छी वर्षा का योग है। शनि इस वर्ष मीन राशि में ही रहेंगे किन्तु 26 जुलाई से 10 दिसंबर तक शनि वक्री रहेंगे जिसके चलते मानसून के अंतिम दो महीनों (अगस्त और सितम्बर) में असामान्य वर्षा होगी। शनि और गुरु के प्रभाव से इस वर्ष महंगाई बढ़ेगी, भारत सहित विश्व के कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता, सरकार विरोधी जन-आंदोलन, मानसून समय से पूर्व आने जैसी स्थितियां बनेंगी। सूर्य की मेष संक्रांति मंगलवार को पड़ रही है, इसलिए इस संवत के मंत्री का पद क्रूर ग्रह मंगल को मिला है। इसके चलते सीमाओं पर तनाव होगा, युद्ध के कारण विश्व में महंगाई बढ़ेगी, असामान्य वर्षा होगी और गर्मियों में अग्निकांड से जन-धन की हानि होगी। इस वर्ष संवत्सर का नाम रौद्र है, जो ही महंगाई बढ़ाने वाला और असामान्य वर्षा से किसानों को कुछ कष्ट दे सकता है।

हिन्दू नववर्ष कुंडली दे रही राजनीतिक अस्थिरता का संकेत

इस वर्ष विवादों के छठे भाव के स्वामी सूर्य लग्न में पंचमेश (मंत्री पद) चन्द्रमा के साथ विराजमान हैं जिसके साथ अष्टम भाव (स्कैंडल) के स्वामी और स्त्री कारक ग्रह शुक्र की युति हो रही है और साथ में द्वादश (हानि और विदेश) भाव के अधिपति शनि भी लग्न में स्थिर हैं। यह योग किसी विदेशी षड़यंत्र या स्कैंडल के चलते भारत में केंद्र सरकार को असहज कर सकता है। विशेष रूप से अप्रैल से जुलाई का समय केंद्र सरकार के लिए बेहद कठिन हो सकता है।

समय से पहले मानसून का संकेत


इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन देश के लिए हिस्सों में अच्छी वर्षा हुई है। ऐसा अनुभूत है कि यदि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (नवरात्रि के प्रथम दिन) को वर्षा हो तो मानसून समय से कुछ दिन पूर्व भी आ सकता है। इस वर्ष मई के महीने में गुरु के मिथुन राशि में शुभ ग्रहों शुक्र और बुध से युति के चलते मानसून समय से पूर्व यानि अपनी संभावित तिथि 1 जून से कुछ पहले आ सकता है।

पड़ोसियों के साथ बढ़ेगा तनाव

मीन लग्न की हिन्दू नववर्ष की कुंडली में पडोसी देशों के तीसरे भाव पर शनि की तीसरी दृष्टि और मंगल की चौथी दृष्टि इस वर्ष सीमा विवाद और कुछ आतंकी घटनाओं का संकेत दे रही हैं विशेष रूप से अप्रैल से जुलाई के मध्य। आजाद भारत की कुंडली में मंगल, राहु और गुरु की विंशोत्तरी दशा अप्रैल-मई के समय में विदेशी मामलों से जुड़े विवाद दिखा रही है।

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