Chaitra Navratri 2026 Third Day: तीसरे दिन इस योग में करें मां चंद्रघंटा की उपासना, जानें पूजा विधि और मुहूर्त

Chaitra Navratri 2026 Third Day: आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। मां के इस स्वरूप के माथे पर चंद्रमा के आकार का घंटा बना हुआ है। इनकी उपासना से भय, रोग और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहते हैं। आइए जानें आज कौन से योग में होगी मां चंद्रघंटा की पूजा

अपडेटेड Mar 21, 2026 पर 9:37 AM
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चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन रवि योग का संयोग बन रहा है।

Chaitra Navratri 2026 Third Day: चैत्र नवरात्रि का पर्व देश के बड़े हिस्से में आस्था और धूमधाम से मनाया जा रहा है। आज नवरात्रि का तीसरा दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप को समर्पित है। मां के इस स्वरूप की पूजा करने से भय, रोग और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहते हैं। माना जाता है कि नवरात्रि के तीसरे दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में स्थित होता है, जिससे आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होती है। मां चंद्रघंट के माथे पर अर्ध चंद्र के आकार घंटा बना है। इसी वजह से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का यह स्वरूप अद्भुत तेज और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। इनकी उपाय करने से भक्तों को शांति, सौम्यता और निर्भयता का वरदान प्राप्त होता है।

तीसरे दिन रवि योग में मां चंद्रघंटा की उपासना

चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन रवि योग का संयोग बन रहा है। रवि योग रात 12 बजकर 37 मिनट से लेकर 22 मार्च की सुबह 6 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। इस बीच आप माता चंद्रघंटा की पूजा-उपासना कर सकते हैं।

मां चंद्रघंटा के जन्म की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार प्राचीन काल में देवताओं और असुरों के बीच लंबे समय तक युद्ध चला। असुरों के स्वामी महिषासुर ने देवतालोक पर विजय प्राप्त कर इंद्र का सिंहासन हासिल कर लिया और स्वर्ग लोक पर राज करने लगा। देवताओं की व्यथा सुन ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे। उनके क्रोध से उत्पन्न ऊर्जा और देवताओं की संयुक्त शक्ति से मां भगवती का अवतरण हुआ, जिन्हें सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। इंद्र ने अपना वज्र एवं ऐरावत हाथी माता को भेंट किया। सूर्य ने अपना तेज, तलवार और सवारी के लिए शेर प्रदान किया। युद्धभूमि में देवी चंद्रघंटा ने महिषासुर नामक दैत्य का वध किया।

पूजाविधि, फल और स्तवन मंत्र


इस दिन एक साफ स्थान पर पीला वस्त्र बिछाकर मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पास में कलश स्थापित कर उस पर नारियल रखें। मां को शुद्ध जल और पंचामृत से स्नान कराएं। चंदन, रोली, हल्दी, फूल, दूर्वा आदि से मां का पूजन करें। सफेद कमल, लाल गुड़हल और गुलाब की माला अर्पण करें और प्रार्थना करते हुए मंत्र जप करें। मां को केसर-दूध से बनी मिठाई या या खीर का भोग लगाएं। अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें

आरोग्य, चिरायु, सुखी और संपन्न जीवन का देती हैं आशीर्वाद

इनकी पूजा करने से ये अपने भक्तों के कष्टों का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं एवं उनकी प्रेत-बाधादि से रक्षा करती हैं। इनकी आराधना से साधकों को चिरायु, आरोग्य, सुखी और संपन्न होने का वरदान प्राप्त होता है। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएं नष्ट हो जाती हैं।

मां चंद्रघंटा के बीज मंत्र

इस दिन ''ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'' या ''ऊं चंद्रघंटायै नमः'' मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का 108 बार जाप करने से विशेष लाभ मिलता है।

ये मंत्र भी पढ़ें

"या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः।।

पिंडजप्रवरारूढ़ा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।"

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