Hindu Nav Varsh: 19 मार्च से शुरू होगा हिंदू नववर्ष, विक्रम संवत 2083 में होंगे दो ज्येष्ठ और 13 महीनों का होगा साल

हिंदू परंपरा में, नया संवत्सर एक नई शुरुआत, नई ऊर्जा और नए संकल्पों का प्रतीक माना जाता है। हर साल की तरह, इस बार भी हिंदू नववर्ष नई संभावनाओं के साथ कुछ चुनौतियां भी लाएगा। ज्योतिष के अनुसार, विक्रम संवत 2083 'रौद्र' संवत्सर होगा

अपडेटेड Mar 13, 2026 पर 10:42 PM
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विक्रम संवत 2083 में एक और संयोग ये होगा कि इसमें 12 की जगह 13 महीने होंगे।

Hindu Nav Varsh 2026 date: हिंदू नववर्ष हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। इस दिन से नया विक्रम संवत शुरू होता है। इसका अलग नाम, राजा और मंत्री होते हैं। हिंदू परंपरा में, नया संवत्सर एक नई शुरुआत, नई ऊर्जा और नए संकल्पों का प्रतीक माना जाता है। हर साल की तरह, इस बार भी हिंदू नववर्ष नई संभावनाओं के साथ कुछ चुनौतियां भी लाएगा। ज्योतिष के अनुसार, विक्रम संवत 2083 'रौद्र' संवत्सर होगा, जिसका असर पूरे साल महसूस होने की उम्मीद है। इसके राजा बृहस्पति होंगे, जबकि मंत्री मंगल देव होंगे। विक्रम संवत 2083 में एक और संयोग ये होगा कि इसमें 12 की जगह 13 महीने होंगे। इस संवत में हिंदू महीना ज्येष्ठ दो बार होगा। आइए जानें इस साल हिंदू नववर्ष कब से शुरू होगा और इसमें क्यों बढ़ रहा है एक अतिरिक्त महीना?

विक्रम संवत 2083 शुरू होने की तारीख

साल 2026 में हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 19 मार्च से शुरू होगा। इसी दिन से विक्रम संवत 2083 का आरंभ माना जाएगा। वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन तक रहेगी। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। यही कारण है कि इस तिथि को बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है।

2026 में शुरू होगा रौद्र संवत्सर

ज्योतिष के अनुसार, वर्ष 2026 में शुरू होने वाले नए संवत्सर को 'रौद्र संवत्सर' कहा जा रहा है। इस वर्ष के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे। वैदिक ज्योतिष में हर साल का प्रभाव इन ग्रहों की स्थिति के आधार पर देखा जाता है। बृहस्पति को ज्ञान, धर्म और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जबकि मंगल साहस और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में इस साल धर्म, पराक्रम और सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है।

क्यों होगा 13 महीनों का साल?


सामान्य तौर पर हिंदू पंचांग में 12 महीने होते हैं, लेकिन विक्रम संवत 2083 में कुल 13 महीने होंगे। इसकी वजह है अधिक मास का पड़ना। इस साल ज्येष्ठ मास दो बार आएगा, इसलिए साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाएगा। इस अतिरिक्त महीने को मलमास, अधिकमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है।

क्या होता है अधिकमास?

हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित है। चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष करीब 365 दिनों का माना जाता है। इस तरह दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर रह जाता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है। यही अतिरिक्त महीना अधिक मास कहलाता है। वर्ष 2026 में यह अधिक मास 17 मई से 15 जून के बीच रहेगा। इसके कारण कई प्रमुख व्रत और त्योहार सामान्य समय से करीब 15 से 20 दिन आगे हो सकते हैं।

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