Holashtak 2026: होलाष्टक के ये 8 दिनों में जरूर करें ये 4 काम, जीवन में आएगी शांति, समृद्धि और खुशहाली

Holashtak 2026: होली से पहले 8 दिनों का होलाष्टक शुरू हो चुका है। इस दौरान शुभ और नया काम नहीं कर सकते हैं, लेकिन इस अवधि में दान-पुण्य का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इन दिनों में दान करने से जीवन में सकारात्मक असर पड़ता है और सुख, समृद्धि के साथ खुशहाली आती है

अपडेटेड Feb 25, 2026 पर 6:12 PM
Story continues below Advertisement
ये समय पूजा, मंत्र साधना, दान-पुण्य आदि करने के लिए अच्छा माना जाता है।

Holashtak 2026: होलाष्टक की शुरुआत रंगों के पर्व होली से 8 दिन पहले होती है। पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से होलाष्टक का प्रारंभ होता है। ये 8 दिन हिंदू धर्म अशुभ माने जाते हैं, इसलिए इसमें शुभ और मांगलिक कार्य के साथ ही कोई नया काम भी नहीं किया जाता है। हालांकि, ये समय पूजा, मंत्र साधना, दान-पुण्य आदि करने के लिए अच्छा माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राक्षसराज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को श्री हरि भगवान विष्णु की भक्ति से विमुख करने के लिए घोर यातनाएं दी थीं, वो इन्ही आठ दिनों में दी थीं। इसलिए इस समय को किसी भी अच्छे काम के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह समय आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। होलाष्टक के 8 दिन का समय आध्यात्मिक अनुशासन, दान, पूजा और अच्छे आचरण का अवसर है। इस दौरान नियमों का पालन करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव और मानसिक शांति आती है। अगर श्रद्धा और नियम के साथ पूजा-पाठ किया जाए, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिलते हैं। माना जाता है कि होलाष्टक के दौरान दान करने से जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।

होलाष्टक के दौरान क्या करें

होलाष्टक के दिनों में दान पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। जरूरतमंद और गरीबों को वस्त्र, अनाज, गुण, या आर्थिक सहायता दें। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

इस अवधि में घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साफ-सुथरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। शाम के समय दीपक जलाएं, भजन-कीर्तन करें और इससे घर में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम के अनुसार, होली के 8 दिन पहले से ही होलाष्टक प्रारंभ हो जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। भगवान विष्णु, कृष्ण और अपने इष्ट देवता की पूजा करें। मंत्र का जाप करें और इससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।


होलाष्टक में सद्गुणों का पालन करना भी बहुत शुभ माना जाता है। दूसरों की मदद करें। मधुर व्यवहार बनाए रखें और अच्छे आचरण से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Holika dahan parikrama 2026: होलिका दहन के ये नियम मानना है जरूरी, जानें 3, 5 या 7 कितनी बार करें होलिका की परिक्रमा और इसका महत्व क्या है?

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।