Holika Dahan 2026 Muhurat: होली का पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। इससे एक दिन पहले यानी फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है। लेकिन इस साल होलिका दहन यानी फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लग रहा है। ये चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी माना जाएगा। इस साल होलिका दहन के दिन एक और दुर्लभ संयोग बन रहा है, इस दिन भद्रा काल भी लग रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दोनों ही अवधियों में कोई भी शुभ काम या पूजा-पाठ करना वर्जित है। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस साल होलिका दहन पर सिर्फ 12 मिनट का समय मिलेगा।
होलिका दहन के लिए सिर्फ 12 मिनट का समय
इस साल फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च को शाम 5:56 बजे शुरू होगी, जो की अगले दिन यानी 3 मार्च को शाम 5:07 बजे तक रहेगी, जबकि इस दौरान सूर्यास्त नहीं होगा। इसलिए प्रदोष काल भी लागू नहीं होगा। इस वजह से होलिका दहन 2 मार्च सोमवार को शाम 6:24 बजे से 6:36 बजे के बीच किया जाना श्रेष्ठ रहेगा।
फाल्गुन पूर्णिमा पर लग रहा चंद्र ग्रहण
खास बात यह भी है कि चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर बाद 3:20 बजे शुरू हो जाएगा और ग्रहण का समापन शाम 6:48 बजे होगा। अत: प्रदोष काल में पूर्णिमा 2 मार्च को ही प्राप्त होने से होलिका पर्व 2 मार्च यानी सोमवार को ही मनाया जाएगा। इस दिन भद्रा शाम 5:56 बजे से अगले दिन मंगलवार सुबह 5:32 बजे तक रहेगी।
पंचांग के अनुसार, 02 मार्च 2026 सोमवार को सायं 06:24 से सायं 06:36 के मध्य प्रदोषकाल में होलिका दहन किया जा सकता है। इसके अलावा भद्रा पुच्छ मध्यरात्रि 01:23 से 02:34 तक रहेगी। परंपरा के अनुसार, इसमें होलिका दहन किया जा सकता है। यदि भद्रा निशीथकाल से आगे तक रहे तो होलिका दहन भद्रकाल पुच्छ या प्रदोष में कर सकते हैं। 2 मार्च 2026 को, भद्रा और भद्रा पुच्छ ही निशीथकाल से आगे तक व्याप्त हैं। प्रदोष काल ही होलिका दहन हेतु श्रेष्ठ हैं।
3 मार्च को लगेगा चंद्र ग्रहण
साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:48 बजे समाप्त होगा। चंद्रोदय शाम 6:29 बजे और ग्रहण का समापन 6:48 बजे होगा। इससे ग्रहण काल मात्र 18 मिनट का रहेगा। ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में लगेगा। इसका सूतक मंगलवार सुबह 6:20 बजे से लागू होगा।