Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व शिव भक्तों के लिए बहुत आस्था और भक्ति का दिन होता है। इस दिन देश भर के शिव मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ता है। चारों तरफ का माहौल शिवमय हो जाता है। बेलपत्र, धतूरा, फूल माला, फल, आदि की मांग बढ़ जाती है। कोई भी इस दिन अपने ईष्ट को ये चीजें अर्पित करने से चूकना नहीं चाहता है। भगवान शिव की ये प्रिय रात्रि हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन असंख्य शिव भक्त उपवास करते हैं और कई तरह से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर 5 चीजें अर्पित करने का नियम है, जिन्हें जानना जरूरी है। इन नियमों की अनदेखी आपको भारी पड़ सकती है। आइए जानें कौन सी हैं ये 5 चीजें और क्या हैं इनके नियम ?
कटे-फटे बेलपत्र नहीं चढ़ाने चाहिए
भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय है। यह उन्हें अर्पित करने वाली सबसे महत्वपूर्ण सामग्री है। शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन तीन पत्तों वाला अखंड और बिना कटा-फटा बेलपत्र ही शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। बेलपत्र का चिकना और साफ हिस्सा हमेशा शिवलिंग की ओर होना चाहिए।
आधी होती है शिवलिंग की परिक्रमा
शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा आधी ही की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परिक्रमा करते समय जलाधारी या सोमसूत्र को कभी भी पार नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि इसी मार्ग से शिव की दिव्य ऊर्जा प्रवाहित होती है, इसलिए इसका सम्मान करना आवश्यक है।
शिवलिंग की पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना वर्जित है। इसके पीछे पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्य का वध किया था और उसके शरीर की अस्थियों से शंख उत्पन्न हुआ। इसी कारण शिवलिंग पूजा में शंख का प्रयोग नहीं किया जाता।
शिवलिंग पर नहीं चढ़ती हल्दी और श्रृंगार सामग्री
शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित नहीं की जातीं। भगवान शिव को वैराग्य और तप का प्रतीक माना जाता है। अगर, माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र पूजा के लिए स्थापित हो, तो वहां इन सुहाग सामग्री का प्रयोग किया जा सकता है।
पूजन सामग्री से जुड़े विशेष नियम
शिवपुराण के अनुसार केतकी, कनेर, कमल और तुलसी के पत्ते भी शिवलिंग पर अर्पित नहीं किए जाते हैं। इसके स्थान पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी के पत्ते अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ये सामग्री शिवजी को प्रिय है और पूजा में पूर्णता लाती है।
साबुत और साफ अक्षत करें अर्पित
शिवलिंग पर अक्षत अर्पित हमेशा साफ, साबुत और पूर्ण होना चाहिए। टूटे या खंडित अक्षत अर्पित करना वर्जित है, क्योंकि इससे पूजा अधूरी मानी जाती है। शुद्ध और साबुत अक्षत श्रद्धा और पूजा की पूर्णता का प्रतीक है।