Holika Dahan 2026 Today: आज ही किया जाएगा होलिका दहन, जानें मुहूर्त, भद्रा का समय और पूजा विधि

Holika Dahan 2026 Today: आज पूरे देश में होलिका का अनुष्ठान धूमधाम से किया जाएगा। रंगों के पर्व होली से पहले किया जाने वाला ये बेहद अहम आयोजन होता है। इसे फाल्गुन पूर्णिमा की रात को किया जाता है। आइए जानें इस साल होलिका दहन कब किया जाएगा? साथ ही जानें भद्र का समय और पूजा विधि

अपडेटेड Mar 02, 2026 पर 11:19 AM
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रंगों के पर्व होली से एक दिन पहले फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होलिका दहन किया जाता है।

Holika Dahan 2026 Today: आज पूरे देश में धूमधाम से होलिका दहन किया जाएगा। ये रंगों के पर्व होली से एक दिन पहले फाल्गुन पूर्णिमा की रात को किया जाता है। यह बेहद अहम धार्मिक अनुष्ठान बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व के बाद की अगली सुबह रंगों का पर्व होली मनाया जाता है, जो चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि होती है। इस साल होली के पर्व और होलिका दहन की तारीख को लेकर भक्तों कंफ्यूजन है, क्योंकि इस साल फाल्गुन पूर्णिमा को ही साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लग रहा है।

ये ग्रहण भारत में नजर आएगा, इसलिए इसका सूतक काल भी माना जाएगा। इस साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि आज, 2 मार्च 2026 को शाम 5.55 बजे लग रही है, लेकिन इसके साथ ही भद्र भी प्रारंभ हो रही है। आज लग रही भद्र का वास पृथ्वी पर है, इसलिए इस अविध में होलिका दहन नहीं किया जा सकता है। भद्र काल को शुभ और धार्मिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है और होलिका दहन में इसका विचार किया जाता है। इसलिए आइए जानें इस साल होलिका दहन का क्या समय रहेगा, पूजा विधि, भद्र का समय और महत्व क्या है?

आज होगा होलिका दहन

होलिका दहन 2 मार्च, 2026 को किया जाएगा और रंगवाली होली या धुलंडी 4 मार्च, 2026 को मनाई जाएगी।

पूर्णिमा तिथि शुरू - 02 मार्च, 2026 को शाम 05:55 बजे

पूर्णिमा तिथि खत्म - 03 मार्च, 2026 को शाम 05:07 बजे


होली 2026: भद्र कब से कब तक?

भद्रा पुंछ 3 मार्च, 2026 - मध्यरात्रि 01:25 बजे से मध्यरात्रि 02:35 बजे तक

भद्रा मुख 3 मार्च, 2026 - मध्यरात्रि 02:35 बजे से प्रात:काल 04:30 बजे तक

होलिका दहन मुहूर्त 3 मार्च, 2026 - शाम 06:22 बजे से रात 08:50 बजे तक

होलिका दहन 2026: महत्व

होलिका दहन एक बड़ा धार्मिक आयोजन है, जिसे छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। इसमें लोग आग की पूजा करते हैं। होलिका हिरण्यकश्यप की बहन थी, जो राक्षसों का राजा था और भक्त प्रहलाद का पिता था। उन दोनों ने प्रहलाद को मारने की कोशिश की लेकिन भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की और होलिका आग की लपटों में जल गई।

होलिका दहन 2026: क्षेत्रपाल की पूजा

क्षेत्रपाल भगवान काल भैरव का एक और रूप हैं, जो आपके रहने वाले इलाके और आपके घर का भी ध्यान रखते हैं। होली, दिवाली और दशहरा जैसे शुभ त्योहारों पर क्षेत्रपाल जी की पूजा करना बहुत जरूरी है। लोग इसमें दीया जलाकर और हलवा पूरी या पूड़े का भोग लगाकर भैरव बाबा की पूजा करते हैं। इसके लिए होलिका दहन की जगह पर सरसों के तेल का एक दीया और मिट्टी का एक चौमुखी दीया लेकर जाना चाहिए।

होलिका दहन 2026: पूजा विधि

चौमुखी दीया जलाएं : काल भैरव के रूप क्षेत्रपाल के लिए शाम 4 से 5 बजे के बीच सरसों के तेल का चौमुखी दीया जलाएं। साथ ही, मालपुआ या सूजी का हलवा जैसी कुछ घर की बनी मिठाई का भोग अर्पित करें। माना जाता है कि वह अपने भक्तों को हर दर्द से राहत देते हें और कम उम्र में मृत्यु के डर से रक्षा करते हैं।

प्रसाद : पानी के मिश्रण में दूध, हल्दी, रोली, गेहूं का आटा, कच्चा सूत, अक्षत, गुड़, माला, मिट्टी का दीया, देसी घी और अगरबत्ती डालें।

परिक्रमा करें : होलिका की सात बार परिक्रमा करें, होलिका को कच्चे सूत में लपेटें और पानी अर्पित करें।

गाय के गोबर के उपले चढ़ाएं : कपूर, इलायची, लौंग, काली मिर्च और दूसरी हवन सामग्री के साथ होलिका में गाय के गोबर के उपले चढ़ाएं।

तिलक लगाएं : जहां होलिका जलाई जाती है, वहां रोली और हल्दी का तिलक लगाएं।

दीया जलाएं : भक्तों को अगरबत्ती और देसी घी का दीया जलाना चाहिए।

भोग प्रसाद चढ़ाएं : घर पर बनी मिठाइयां, जैसे हलवा और मालपुआ, जरूर खिलाएं।

मंत्र

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय..!!
  • राम राम रामेति रामे रामे मनोरमे सहस्रनाम ततुल्यम राम नाम वरानने..!!
  • हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे..!

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