Jyeshtha Adhik Maas Amavasya 2026: इस साल हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह में अधिक मास का दुर्लभ संयोग बना है। अधिक मास हर तीन साल में आता है। यह अतिरिक्त महीना जब किसी माह में जुड़ता है, तो उसकी अवधि 28-29 दिन से बढ़ कर 59-60 दिनों की हो जाती है। इस अवधि में 4 एकादशी, 4 प्रदोष व्रत, 2 पूर्णिमा और 2 अमावस्या तिथियां आती हैं। इस साल ज्येष्ठ अधिक मास की शुरुआत 17 मई 2026 को हो चुकी है और इसका समापन 15 जून, 2026 को होगा। इसी दिन ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या भी मनाई जाएगी।
हिंदू धर्म में अमावस्या को आत्मचिंतन, साधना और पितरों को याद करने का दिन माना गया है। अधिक मास की अमावस्या होने के कारण यह तिथि और भी खास मानी जा रही है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन दान, पुण्य और पितृ शांति के लिए बेहद शुभ रहेगा। अधिक मास का धार्मिक महत्व सामान्य महीनों से अधिक माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए दान-पुण्य, जप-तप और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसी वजह से अधिक मास की अमावस्या पर लोग तीर्थ स्नान, गरीबों को दान और पितरों के लिए तर्पण करना शुभ मानते हैं।
अधिक मास ज्येष्ठ अमावस्या कब है?
साल 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या 15 जून 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। उदयातिथि के अनुसार, स्नान-दान और धार्मिक कार्यों के लिए 15 जून का दिन ही श्रेष्ठ माना गया है।
अमावस्या तिथि समाप्त : 15 जून 2026 को सुबह 08:23 बजे तक
अमावस्या तिथि 14 जून की दोपहर से शुरू हो जाएगी और पूरी रात रहेगी। लेकिन 15 जून को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए उदया तिथि के अनुसार स्नान-दान, पूजा और तर्पण 15 जून को करना श्रेष्ठ माना जाएगा।
ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या पर दुर्लभ महासंयोग
इस साल की ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या बेहद खास और दुर्लभ मानी जा रही है क्योंकि इस दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं:
मिथुन संक्रांति : इसी दिन सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे इस दिन का आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाएगा।
शुभ योग : इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण भी हो रहा है, जिसमें किए गए दान-पुण्य और पितृ तर्पण का अक्षय फल मिलता है।
अधिक मास का समापन : 15 जून को इस अमावस्या के साथ ही साल 2026 का ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) भी समाप्त हो जाएगा।
यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इसमें किए गए दान, जप, पाठ और उपवास का फल कई गुना मिलता है। अमावस्या पर पितरों को जल अर्पण (तर्पण) और पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और परिवार को आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और पुरुषोत्तम माहात्म्य का श्रवण विशेष पुण्यकारी माना जाता है।