Jyeshtha Purnima 2026: कब किया जाएगा साल की सबसे दुर्लभ पूर्णिमा का व्रत? जानें तारीख, महत्व और उपाय

Jyeshtha Purnima 2026: ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को साल की सबसे शुभ पूर्णिमा माना जाता है। इसे साल की दुर्लभ पूर्णिमा भी कहा जा रहा है। इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा है। इसकी पूर्णिमा ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा होगी। इस दिन व्रत, गंगा स्नान और दान-पुण्य किया जाता है। आइए जानें

अपडेटेड May 22, 2026 पर 6:52 PM
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ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026, शनिवार के दिन सुबह 11:57 बजे शुरू होगी।

Jyeshtha Purnima 2026: ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को हिंदू धर्म पवित्र और शुभ फल देने वाली पूर्णिमा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह साल की सबसे शुभ तिथियों में से एक मानी जाती है। इसी दिन देश के कुछ हिस्सों में वट पूर्णिमा व्रत भी किया जाता है। लेकिन इस साल की ज्येष्ठ पूर्णिमा और भी खास है, क्योंकि इस बार ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा है। ज्येष्ठ अमावस्या के अगले दिन यानी 17 मई 2026 को ज्येष्ठ अधिक माह शुरू हो चुका है।

इसके बाद अब जो पूर्णिमा आएगी वो ज्येष्ठ पूर्णिमा न होकर, ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा होगी। इस पूर्णिमा को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेहद खास माना जाता है, क्योंकि ये हर साल नहीं आती है। इसका दुर्लभ संयोग तीन साल में एक बार बनता है। इस साल ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का संयोग 30-31 मई 2026 को बन रहा है। आइए जानें इसकी सही तारीख, महत्व और उपाय।

कब मनाई जाएगी ज्येष्ठ पूर्णिमा?

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026, शनिवार के दिन सुबह 11:57 बजे शुरू होकर अगले दिन 31 मई 2026, रविवार को दोपहर 02:14 बजे तक रहेगी। ऐसे में ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का व्रत 30 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा तो वहीं स्नान-दान की अधिक पूर्णिमा 31 मई 2026, रविवार के दिन रहेगी। ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम के समय 07:36 बजे होगा।

ज्येष्ठ अधिक मास पूर्णिमा के उपाय


  • पीपल, वट, गूलर, केला, तुलसी, अशोक और बेल जैसे पवित्र पौधों का रोपण करें। पौधा लगाते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
  • केले के वृक्ष और तुलसी माता की विधि-विधान से पूजा करें। तुलसी को जल अर्पित करें और दीपक जलाकर उसकी परिक्रमा करें।
  • इस दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। दान करते समय मन में विनम्रता और श्रद्धा रखें।
  • पूजा के अंत में भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें और आरती अवश्य करें।

ज्येष्ठ अधिक मास पूजा विधि

ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा पर प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। घर और पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें। लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी प्रतिमा स्थापित करें। धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें तथा घी का दीपक जलाएं। पूजा के दौरान कथा और विष्णु चालीसा का पाठ करें, फल-मिठाई का भोग लगाकर जरूरतमंदों को दान दें और इस दिन विवाद और तामसिक भोजन से दूर रहें।

ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ माह में आने वाली पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है। मान्यता है कि पवित्र नदी में स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितृ दोष दूर होता है। ये धार्मिक क्रियाएं जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती हैं।

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