Nirjala Ekadashi Vrat 2026: एक व्रत से पाना चाहते हैं 24 एकादशियों का फल, तो इस दिन करें निर्जला एकादशी का व्रत

Nirjala Ekadashi Vrat 2026: निर्जला एकादशी को पूरे साल में आने वाले सभी एकादशी में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत को करने से पूरे साल की सभी एकादशी का फल एक दिन में मिल जाता है। आइए जानें इस साल निर्जला एकादशी का व्रत किस दिन किया जाएगा

अपडेटेड May 22, 2026 पर 7:00 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
निर्जला एकादशी 2026 का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा।

Nirjala Ekadashi Vrat 2026: निर्जल एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा है, इसलिए यह व्रत जून के अंत में किया जाएगा। सभी एकादशियों में श्रेष्ठ निर्जला एकादशी सबसे कठिन व्रतों में से है, क्योंकि इसमें अन्न-जल दोनों का त्याग किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यदि आप साल भर की सभी 24 एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते हैं, तो केवल निर्जला एकादशी का व्रत पूरी निष्ठा से रखने पर सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल मिल जाता है।

इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इस एकादशी का व्रत करने से पापों का क्षय होता है और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वेदव्यास ने भीमसेन को यह व्रत करने की सलाह दी थी क्योंकि वे अन्य एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते थे। निर्जला एकादशी 2026 का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा और पारण 26 जून, शुक्रवार को होगा। भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

निर्जला एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि का प्रारंभ : 24 जून 2026 (बुधवार) को शाम 06:12 बजे से।

एकादशी तिथि की समाप्ति : 25 जून 2026 (गुरुवार) को रात 08:09 बजे तक।

व्रत की तारीख (उदयातिथि के अनुसार): 25 जून 2026 (गुरुवार)


व्रत पारण का समय : 26 जून 2026 (शुक्रवार) को सुबह 05:25 बजे से 08:13 बजे के बीच।

पूजा विधि

स्नान और संकल्प : सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत का संकल्प लें।

निर्जल उपवास : इस दिन अन्न और जल का त्याग कर केवल भगवान विष्णु की पूजा करें।

पीले वस्त्र और अर्पण : पीले वस्त्र पहनकर पीले पुष्प, चंदन, तुलसी दल, धूप-दीप अर्पित करें।

मंत्र जप : “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

आरती और कथा : भगवान लक्ष्मीनारायण की आरती करें और निर्जला एकादशी की कथा सुनें।

निर्जला एकादशी दान

निर्जला एकादशी को साल की सबसे बड़ी और कठिन एकादशियों में से एक माना जाता है, क्योंकि इस व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक जल और अन्न का त्याग करना होता है। सामर्थ्य के अनुसार इस दिन घड़ा (कलश), आम, तरबूज, वस्त्र और सत्तू का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।

Ganga Dussehra 2026: अधिक मास में मनाया जाएगा गंगा दशहरा का पर्व, जानें सही तारीख और महत्व

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।