Kanya Puja 2026 Age of Girls: देश के बड़े हिस्से में इस समय चैत्र नवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित ये पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है और नवमी तिथि को राम नवमी के पर्व के साथ समाप्त होता है। नौ दिनों के इस पर्व में अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 2 से 10 साल की कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है और उनकी पूजा की जाती है। लेकिन कंजक या कन्या पूजन से पहले यह जानना भी जरूरी है कि किस उम्र की कन्या में कौन सी देवी का रूप होता है? उनकी पूजा के अलग-अलग लाभ भी प्राप्त होते हैं। कन्या पूजा में 10 साल से बड़ी कन्याओं को शामिल नहीं करते हैं।
चैत्र नवरात्रि 2026 कन्या पूजा तारीख
पंचांग के अनुसार, दुर्गा अष्टमी चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाते हैं। इस बार चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि 25 मार्च बुधवार को दोपहर 1:50 बजे से लेकर 26 मार्च गुरुवार सुबह 11:48 बजे तक है। इसलिए दुर्गा अष्टमी 26 मार्च को होती। अष्टमी के दिन जो लोग कन्या पूजा करते हैं, वे 26 मार्च को कन्या पूजा करें।
चैत्र शुक्ल नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे से शुरू हो रही है और यह 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे तक है। उदयातिथि के आधार पर महानवमी 27 मार्च को है। ऐसे में जिनके यहां महानवमी को कन्या पूजा करते हैं, वे 27 मार्च को कन्या पूजा कर लें।
उम्र के हिसाब से हर कन्या में अलग देवी का वास
3 वर्ष की कन्या को देवी त्रिमूर्ति का स्वरूप कहा जाता है। जो व्यक्ति नवरात्रि में 3 साल की कन्या की पूजा करता है, जो उसका जीवन धन, धान्य और सकारात्मकता से भर जाता है।
4 साल की बालिका को देवी कल्याणी का स्वरूप माना जाता है। इनकी पूजा करने से पूरे परिवार का कल्याण होता है। जीवन में सुख और शांति आती है।
5 वर्ष की कन्याओं को देवी रोहिणी का स्वरूप मानते हैं। नवरात्रि में इस उम्र की कन्याओं की पूजा करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और व्यक्ति आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त करता है।
6 साल की बालिकाओं को मां काली का स्वरूप माना जाता है। मां काली शक्ति और विजय का प्रतीक हैं। इनकी पूजा करने वाले को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
7 वर्ष की कन्याओं को मां चंडिका का स्वरूप मानते हैं। ये मां दुर्गा का उग्र स्वरूप हैं। जो इनकी पूजा करता है, उसके धन, ऐश्वर्य, शक्ति, विजय, सबकुछ की प्राप्ति होती है।
8 साल की लड़कियों को मां शांभवी का स्वरूप मानते हैं। इनकी पूजा करने से कोर्ट केस, वाद विवाद आदि में सफलता मिलती है।
9 वर्ष की कन्या की पूजा मां दुर्गा के स्वरूप में करते हैं। उनकी कृपा से व्यक्ति की सभी शुभ कामनाएं पूर्ण होती हैं।
10 साल की कन्याओं को देवी सुभद्रा के रूप में पूजा की जाती है। इस देवी के आशीर्वाद से भी व्यक्ति को सफलता, शक्ति, आरोग्य, मोक्ष सबकुछ प्राप्त होता है।