Kharmas 2026: जानें 31 दिनों तक क्यों लगेगी शुभ कार्यों पर रोक, कब से शुरू हो रहा है खरमास और साल में कितनी बार लगता है खरमास?

Kharmas 2026: भगवान सूर्य जब अपने मित्र और देवगुरु बृहस्पति की राशि में गोचर करते हैं तब खरमास लगता है। साल में दो बार ऐसा होता है। मार्च में सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे, उसी दिन से खरमास प्रारंभ हो जाएंगे। आइए जानें इस कब से कब तक रहेगा खरमास और ये कितनी बार लगता है

अपडेटेड Mar 12, 2026 पर 7:35 PM
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नवरात्रि में देवी के दिनों में विवाह छोड़ कर अन्य शुभ कार्य कर सकते हैं।

Kharmas 2026: ज्योतिष शास्त्र में खरमास को अच्छा समय नहीं माना जाता है। ये लगभग एक महीने का समय होता है, जिसमें शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। माना जाता है कि इस अवधि में सूर्य और देवगुरु बृहस्पति की शक्ति कमजोर होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में शादी, मुंडन, गृह प्रवेश और नया काम शुरू करने पर रोक रहती है, क्योंकि इनमें प्रत्यक्ष देव सूर्य और बृहस्पति का शुभ स्थिति में होना जरूरी माना जाता है।

दरअसल, खरमास तब लगता है जब भगवान सूर्य अपने मित्र और देवताओं के गुरु बृहस्पति की राशि में प्रवेश करते हैं। बृहस्पति धनु और मीन राशियों के स्वामी हैं। जब सूर्य देव इन राशियों में गोचर करते हैं, तभी खरमास लगता है। आइए जानें इस साल खरमास कब से कब तक रहेगा और साल में कितनी बार लगता है खरमास ?

15 मार्च से लगेगा खरमास

पंचांग के अनुसार, खरमास की शुरुआत इस साल 15 मार्च से होगी और यह अगले महीने 14 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा। पंचांग के अनुसार, 14 मार्च को सूर्य देव कुंभ राशि को छोड़कर मीन राशि में रात्रि 01:03 मिनट में प्रवेश करेंगे। मीन संक्रांति 15 मार्च 2026, रविवार को होगी। इसका पुण्य काल प्रात:काल 06:31 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। वहीं इसका महापुण्यकाल सुबह 06:31 से लेकर 08:31 बजे तक रहेगा।

क्या होता है खरमास?

ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास एक विशेष अवधि है। खरमास तब लगता है, जब सूर्य बृहस्पति की राशियों (धनु और मीन) में गोचर करते हैं। इस समय गुरु का प्रभाव क्षीण माना जाता है। इस दौरान शुभ तथा मांगलिक कार्यो पर रोक लग जाती हैं। हिंदू वर्ष में खरमास दो बार लगता है, एक बार जब सूर्य मीन राशि में गोचर दूसरी बार जब धनु राशि में रहते हैं।


खरमास में नहीं होंगे मांगलिक कार्य

15 मार्च से खरमास शुरू होने के कारण मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। इस अवधि में नवरात्र के दौरान ही मांगलिक कार्यक्रम हो सकते हैं। खरमास की अवधि 14 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल तक कुल 31 दिन की होगी।

नवरात्रि में विवाह को छोड़ अन्य शुभ कार्य मान्य

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में देवी के दिनों में विवाह छोड़ कर अन्य शुभ कार्य कर सकते हैं। लेकिन 22 दिनों तक मांगलिक कार्य जैसे गृह प्रवेश, अन्नप्राशन, शादियां आदि मांगलिक कार्य नहीं कर सकते हैं। 14 अप्रैल को जब सूर्य देव मीन राशि से निकल कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे तक खरमास समाप्त हो जाएगा और मांगलिक कार्य फिर से शुरू होंगे।

इस दिन खत्म होगा खरमास

14 अप्रैल को सूर्य देव मीन राशि को छोड़ कर मेष राशि में प्रातः 01:30 मिनट में प्रवेश करेंगे तो पुनः 15 अप्रैल से मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।

खरमास के नियम

  • हिंदू मान्यता के अनुसार खरमास में किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।
  • खरमास के दौरान व्यक्ति को धन का लेन-देन सूझबूझ से करें और वाद-विवाद से बचें।
  • खरमास में मांस-मदिरा आदि तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
  • खरमास में लक्ष्मी-नारायण और सूर्य देवता की प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।
  • यदि संभव हो तो खरमास में रोजाना गंगा जैसे पवित्र जलतीर्थ में स्नान करना चाहिए।
  • खरमास में सूर्योदय से पहले स्नान-ध्यान और सूर्य उपासना करने से सुख-सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

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