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Kalsarp Dosh: 12 तरह के होते हैं कालसर्प दोष, जीवन पर इस तरह डालते हैं असर

Types of Kalsarp Dosh: ज्योतिष में कालसर्प दोर्ष की खास जगह है। इसे सबसे खतरनाक दशाओं में से एक माना जाता है। इससे प्रभावित व्यक्ति के जीवन में गंभीर असर होता है। इसकी अहमियत इसलिए भी अधिक है क्योंकि ये 1 या 2 नहीं पूरे 12 तरह का होता है और हर एक का असर भी अलग तरह का होता है। आइए जानें।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 30, 2025 पर 3:19 PM
Kalsarp Dosh: 12 तरह के होते हैं कालसर्प दोष, जीवन पर इस तरह डालते हैं असर

कालसर्प दोर्ष ग्रहों की बहुत महत्वपूर्ण दशा होती है। ये तब बनती है जब कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं। इसके असर से व्यक्ति को जीवन में कई तरह की गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके कुंडली के सबसे गंभीर और खतरनाक दोषों में से एक माना जाता है। यह कॅरियर, सेहत संबंध समेत जीवन के हर पक्ष को प्रभावित करता है। इतना ही नहीं कई मामलों में तो ये जानलेवा तक साबित होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ये 12 प्रकार का होता है। हर एक प्रकार का असर और उपाय अलग-अलग होता है। आइए जानते हैं कुंडली में कालसर्प दोष कब बनता है और ये कितने तरह का होता है ?

कब बनता है कालसर्प दोष ?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारी कुंडली में नौ ग्रह होते हैं, जिनमें राहु और केतु भी शामिल हैं। ये दोनों ग्रह अगर कुंडली के दो छोर पर हैं और बाकी सारे ग्रह इनके बीच स्थित हैं, तो यह स्थिति कालसर्प दोष बनाती है। हालांकि, ये दोनों छाया ग्रह हैं,लेकिन इनकी ये युति जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

कालसर्प दोष के हैं 12 प्रकार

अनंत कालसर्प दोष : इस दोष का निर्माण तब होता है, जब कुंडली में राहु लग्न भाव में और केतु सप्तम भाव में होता है। बाकी सारे ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में स्थित होते हैं। इससे ग्रसित व्यक्ति को सफलता पाने के लिए कई गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन धैर्य के साथ आगे बढ़ने वाले व्यक्ति को अंत में सफलता मिलती है।

कुलिक कालसर्प दोष : इस प्रकार का कालसर्प दोष राहु के द्वितीय भाव में और केतु के अष्टम भाव में होने पर लगता है। इसके शिकार व्यक्ति को जीवन में वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हें घाटा होने का, शर्मिंदगी और कर्ज होने का डर रहता है। इससे बचने के लिए अपने वैवाहिक जीवन में सामंजस्य बनाए रखें।

वासुकि कालसर्प दोष : कुंडली में जब राहु तीसरे स्थान में और केतु नौवें घर में स्थित हो तो वासुकि काल सर्प दोष लगता है। ये दोष पारिवारिक एकता को प्रभावित करता है और इसके विकट होने पर आपसी संबंधों में दूरियां भी आ सकती हैं। परिवार को गंभीर आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता है।

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