कालसर्प दोर्ष ग्रहों की बहुत महत्वपूर्ण दशा होती है। ये तब बनती है जब कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं। इसके असर से व्यक्ति को जीवन में कई तरह की गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके कुंडली के सबसे गंभीर और खतरनाक दोषों में से एक माना जाता है। यह कॅरियर, सेहत संबंध समेत जीवन के हर पक्ष को प्रभावित करता है। इतना ही नहीं कई मामलों में तो ये जानलेवा तक साबित होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ये 12 प्रकार का होता है। हर एक प्रकार का असर और उपाय अलग-अलग होता है। आइए जानते हैं कुंडली में कालसर्प दोष कब बनता है और ये कितने तरह का होता है ?
