Kumbh Sankranti Upay: ज्योतिष शास्त्र संक्रांति को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, सभी ग्रह निश्चित समय पर एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के राशि परिवर्तन की अवधि तकरीबन 30 दिन है, यानी सूर्य किसी राशि में 30 दिन रहने के बाद दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य जिस राशि में प्रवेश करते हैं, उसकी संक्रांति मनाई जाती है। जैसे जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो मकर संक्रांति मनाई जाती है। उसकी तरह अब सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे तब कुंभ संक्रांति मनाई जाएगी।
सूर्य देव 13 फरवरी को राशि परिवर्तन करेंगे। सूर्य देव इस दिन सुबह 04 बजकर 04 मिनट पर मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में गोचर करेंगे। इसलिए 13 फरवरी को कुंभ संक्रांति मनाई जाएगी। इस राशि में सूर्य देव 14 मार्च तक रहेंगे।
कुंभ संक्रांति पर करें ये उपाय
शनि दोष : कुंभ संक्रांति पर तिल और गुड़ का दान बहुत फलदायी माना गया है। ऐसा करने से शनि दोष कम होता है और जीवन में चल रही परेशानियों में धीरे-धीरे राहत मिलती है।
ग्रह दोष : कुंभ संक्रांति के दिन पानी की बर्बादी से बचना चाहिए। कुंभ राशि जल तत्व से जुड़ी है, इसलिए इस दिन जल दान से ग्रह दोष शांत होते हैं और मानसिक शांति मिलती है।
सकारात्मक ऊर्जा : कुंभ संक्रांति नई सोच और बदलाव का प्रतीक है। इस दिन घर की बेकार या पुरानी चीजें दान कर दें या हटा दें। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा बाहर जाती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
स्वास्थ्य सुधार : कुंभ संक्रांति के दिन तांबे के लोटे में साफ पानी, थोड़ा सा रोली और अक्षत डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र या ऊं सूर्याय नमः बोलें। इससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में स्थिरता आती है।
मन की शांति : कुंभ संक्रांति के दिन थोड़ी देर शांत बैठकर मंत्र जप या ध्यान करना बहुत लाभकारी होता है। ऊं नमः शिवाय या ऊं नमो नारायणाय जैसे सरल मंत्रों का जप करने से मन शांत होता है।
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