Magh Month 2026: शुरू होने वाला है माघ का पवित्र महीना, जानें इस माह का धार्मिक महत्व और इसमें आने वाले व्रत-त्योहार

Magh Month 2026: माघ का महीना हिंदू धर्म के धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इस महीने के साथ माघ मेला और कल्पवास भी शुरू होता है। आइए जानें कब से शुरू होगा माघ का महीना और इसका धार्मिक महत्व क्या है

अपडेटेड Dec 31, 2025 पर 9:05 PM
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माघ मास में संगम तट पर नियमपूर्वक स्नान करने से भगवान विष्णु से प्रसन्न होते हैं।

Magh Month 2026: नए साल शुरू होने के साथ ही हिंदू कैलेंडर का 11वां महीना भी शुरू होने जा रहा है। यह माघ का महीना है, जो धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस माह में कई प्रमुख धार्मिक आयोजन होते हैं, जो आध्यात्मिक रूप से अहम स्थान रखते हैं। इस महीने में प्रयागराज के संगम तट पर कुंभ और माघ मेले का आयोजन होता है और कल्पवास की भी शुरुआत होती है। भगवान श्री हरि को समर्पित यह माह जप, तप, स्नान और दान के लिए बहुत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन महीने में देवता भी संगम में स्नान करने के लिए आते हैं।

भगवान विष्णु की साधना का महीना 

यह पावन महीना भगवान विष्णु की साधना के लिए अत्यंत ही शुभ और पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु जप-तप और दान आदि से उतना प्रसन्न नहीं होते हैं, जितना कि माघ मास में संगम तट पर नियमपूर्वक स्नान करने से होते हैं। ऐसे में श्री हरि की कृपा पाने के लिए व्यक्ति को माघ मास में कम से कम एक बार संगम तट पर स्नान करने का प्रयास करना चाहिए। इस साल माघ मास 04 जनवरी 2026 से प्रारंभ होगा और 01 फरवरी 2026 तक रहेगा।

माघ मास के बड़े तीज-त्योहार

माघ के महीने में ही मकर संक्रांति मनाई जाती है, जिसमें सूर्य उत्तरायण होते हैं। इस पावन मास की शुरुआत में सकट चौथ, लोहड़ी, मकर संक्राति जैसे पर्व आते हैं तो उत्तरार्ध में मौनी अमावस्या, गुप्त नवरात्रि, वसंत पंचमी और भानु सप्तमी जैसे पर्व पड़ते हैं। इसके साथ शीतला षष्ठी, षटतिला एकादशी, जया एकादशी, भीमाष्टमी आदि पर्व पड़ते हैं। माघ का महीना शुक्लपक्ष की पंद्रहवीं तिथि यानि माघी पूर्णिमा के दिन पूर्ण होता है।

मात्र तीन दिन में पूरे माह का पुण्य फल


अगर माघ के पूरे महीने में प्रयागराज में संगम स्नान या कल्पवास करना संभव न हो तो वहां तीन या एक दिन रहकर श्रद्धा, विश्वास और नियम से जप-तप और व्रत करने पर पूरे माघ का पुण्यफल प्राप्त होता है।

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