Shattila Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत हो भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय माना जाता है। साल में 24 एकादशी तिथियां आती हैं, जिनमें भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के लिए व्रत करते हैं। हर एकादशी का अपना अगल महत्व और नाम होता है। नए साल 2026 का पहला एकादशी व्रत माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाएगा। माघ मास के कृष्ण पक्ष में षट्तिल एकादशी आती है। आइए जानते हैं कि साल 2026 की पहली एकादशी कब है और इस दिन कौन सा दुर्लभ संयोग बन रहा है?
षट्तिला एकादशी सब पापों का नाश करने वाली है। इस दिन कोई भूल हो जाने पर श्री कृष्ण का नामोच्चारण करना चाहिए। माघ मास की इस एकादशी को बहुत खास माना जाता है। इस व्रत में तिल का बहुत अधिक महत्व है। इस तिल दान करने से कई ग्रह दोषों का भी निवारण हो जाता है। इसके बाद अगले दिन कृष्ण कूर्म द्वादशी है।
इस साल षटतिला एकादशी 14 जनवरी को है। इस दिन मकर संक्राति का पर्व भी है। पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 17 मिनट से शुरू होगी। वहीं, तिथि का समापन 14 जनवरी को शाम 05 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में 14 जनवरी को षटतिला एकादशी व्रत किया जाएगा और 15 जनवरी को व्रत का पारण किया जाएगा।
षटतिला एकादशी व्रत का पारण 15 जनवरी को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से 09 बजकर 21 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय व्रत का पारण कर सकते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 27 मिनट से 06 बजकर 21 मिनट तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 15 मिनट से 02 बजकर 57 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 05 बजकर 43 मिनट से 06 बजकर 10 मिनट तक
निशिता मुहूर्त - 15 जनवरी को रात 12 बजकर 03 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक
148 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग
इस बार मकर संक्रांति और एकादशी दोनों एक दिन है। 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी व्रत का दुर्लभ संयोग 148 साल बाद बन रहा है। 14 जनवरी की रात सूर्य मकर राशि में गोचर करेंगे। एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जबकि संक्रांति सूर्य देव की उपासना का पर्व है। इस विशेष संयोग में किया गया स्नान, दान और जप सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी माना जाता है। मकर संक्रांति पर दान करने का बहुत महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर ग्रह दोषों के अलावा अपने पितरों के लिए भी दान करना चाहिए। इससे उनकी कृपा आप पर बनी रहती है।
कृष्ण कृष्ण संसारा्णवममानां कृपालुस्त्वमगतीनां गतिर्भव । प्रसीद पुरुषोत्तम॥। नमस्ते पुण्डरीकाक्ष नमस्ते विश्वभावन। सुत्रह्मण्यप नमस्तेउस्तु महापुरुष पूर्वज॥। गृहाणार्घ्य मया दत्त लक्ष्म्या सह जगत्पते