Mahashivratri 2026: इस महाशिवरात्रि पर बन रहा ग्रहों का दुर्लभ संयोग, जानें सही तारीख, पूजा मुहूर्त और विधि

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महादेव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इस साल महाशिवरात्रि पर कई ग्रहों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। आइए जानें इन संयोगों और व्रत की सही तारीख के बारे में

अपडेटेड Feb 02, 2026 पर 3:52 PM
Story continues below Advertisement
महाशिवरात्रि का पर्व पर्व हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है।

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और महानतम त्योहारों में से एक माना जाता है। शिव पुराण के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने लिंग रूप में अपने भक्तों को दर्शन दिए थे। कुछ अन्य मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। दुनिया भर में शिव भक्त इस दिन उपवास करते हैं और रुद्राभिषेक जैसे आयोजन का हिस्सा बनते हैं। यह पर्व हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को पड़ रही है। ज्योतिष और पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार इस साल महाशिवरात्रि का पर्व ग्रहों की दुर्लभ स्थिति और शुभ योगों की वजह से बहुत शुभ और पुण्य फलदायी है।

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

शिव पुराण के अनुसार, भगवान ब्रह्मा और श्री हरि विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर हुए विवाद को खत्म करने के लिए भगवान शिव अनंत शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। यह दिव्य घटना फाल्गुन महीने की कृष्ण चतुर्दशी को हुई थी। इसलिए महाशिवरात्रि हर साल इस तिथि पर मनाई जाती है।

महाशिवरात्रि शुभ योग और ग्रहों की स्थिति

इस साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5:06 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 5:35 बजे समाप्त होगी। इस कारण, महाशिवरात्रि 15 फरवरी को त्रयोदशी-युक्त चतुर्दशी के साथ मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य, बुध, राहु और शुक्र एक साथ मिलकर एक शक्तिशाली चतुर्ग्रही योग बनाते हैं।

इसके अलावा सुबह 7:08 बजे से शाम 7:48 बजे तक, सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इसे ज्योतिष में सबसे शुभ योगों में से एक माना जाता है, जो बाधाओं को दूर करने और सफलता सुनिश्चित करने के लिए जाना जाता है। साथ ही, इस दिन उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र के संयोग के साथ व्यतिपात योग भी रहेगा।


महाशिवरात्रि पर है रात के चार प्रहर पूजा का विधान

शास्त्रों में रात के चारों प्रहरों में भगवान शिव की पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि महाशविरात्रि पर चारों प्रहर पूजा करने से धन, प्रसिद्धि, स्थिरता और संतान संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

चार प्रहर पूजा मुहूर्त

पहला प्रहर : शाम 6:15 बजे – रात 9:28 बजे

दूसरा प्रहर : रात 9:29 बजे – सुबह 12:41 बजे

तीसरा प्रहर : मध्यरात्रि 12:42 बजे – मध्यरात्रि 3:54 बजे (16 फरवरी)

चौथा प्रहर : मध्यरात्रि 3:55 बजे – सुबह 7:07 बजे (16 फरवरी)

शिवलिंग अभिषेक के लिए सामग्री

शिवलिंग पर अर्पित की जाने वाली हर सामग्री का अपना अलग महत्व है। जैसे बेलपत्र चढ़ाने से पैसों की तंगी दूर होती है। शहद से अभिषेक करने से करियर की चुनौतियां हल होती हैं। वहीं, दही चढ़ाने से वित्तीय स्थिरता में सुधार होता है, जबकि गन्ने का रस देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करता है। अभिषेक के दौरान 'ओम पार्वतीपतये नमः' का 108 बार जाप करने से अचानक आने वाले संकटों से रक्षा होती है।

Magh Purnima 2026 Ke Upay: आज की रात कर लें बस ये आसान और छोटे उपाय, सुख-समृद्धि से भर जाएगा घर का कोना-कोना

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।