Margashirsha Month 2025: आज कार्तिक पूर्णिमा के साथ कार्तिक मास समाप्त हो जाएगा और कल गुरुवार, 06 नवंबर से मार्गशीर्ष मास की शुरुआत हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण को यह महीना बहुत प्रिय है। इसे अगहन का महीना भी कहते हैं। इस महीने में शादी-विवाह आदि के मुहूर्त होते हैं और गीता जयंती भी आती है। कहते हैं इस महीने में जो भक्त सच्चे मन से भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं मुरलीधर उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। मार्गशीर्ष माह में भगवान श्रीकृष्ण के नाम का जाप करने से ही समस्त कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। वहीं, नकारात्मक शक्तियों को घर-परिवार से दूर करने के लिए इस महीने में शंख में पानी भरकर भगवान श्रीकृष्ण को स्नान कराना चाहिए और उस जल का पूरे घर में छिड़काव करना चाहिए। आइए जानें इस माह की क्या खासियत है और इसमें पूजा के क्या नियम हैं?
मार्गशीर्ष की प्रतिपदा आज
पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि बुधवार, 5 नवंबर शाम 06 बजकर 48 मिनट से शुरू हो रही है। यह तिथि 6 नवंबर दिन गुरुवार को दोपहर 2 बजकर 54 मिनट तक मान्य रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर मार्गशीर्ष माह का शुभारंभ 6 नवंबर गुरुवार से है।
भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना मार्गशीर्ष
भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं कहा है कि सभी मासों में वह मार्गशीर्ष हैं। इस माह को भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना गया है। इस माह में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और उनके मंत्रों का जाप करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस माह में पूजा पाठ करने से भगवान की कृपा आसानी से प्राप्त हो जाती है।
पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को गीता जयंती मनाते हैं। महाभारत युद्ध के समय जब भगवान श्रीकृष्ण ने पूरे संसार को गीता का ज्ञान दिया था, उस समय मार्गशीर्ष का महीना चल रहा था। मार्गशीर्ष माह में ही गीता जयंती मनाई जाती है।