Mesha Sankranti 2026 Upay: मेष संक्रांति का पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाएगा, जब ग्रहों के राजा सूर्य गुरु की राशि मीन से निकल कर मंगल की राशि मेष में प्रवेश करेंगे। इस दिन के बाद से खरमास समाप्त होगा और मांगलिक कार्य शुरू होंगे। ज्योतिष शास्त्र में मेष संक्रांति का विशेष स्थान है। सूर्य जहां इस दिन अपनी उच्च राशि में प्रवेश करते हैं, वहीं इसी दिन से नए सौर वर्ष का भी आरंभ होता है। मेष राशि में सूर्य की ऊर्जा चरम पर होती है, जबकि मीन राशि में सूर्य की शक्ति कमजोर होती है।
मेष संक्रांति का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। इस दिन प्रात:काल पवित्र नदियों में स्नान आदि के बाद सूर्य देव को अर्घ्य, पूजा और दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में स्नान और दान करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं, करियर में तरक्की मिलती है और परिवार में खुशहाली आती है।
मेष संक्रांति शुभ मुहूर्त
मेष संक्रांति का क्षण - सुबह 9 बजकर 39 मिनट पर
मेष संक्रांति पुण्य काल - सुबह 5 बजकर 57 मिनट से दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक
मेष संक्रांति पर स्नान-दान का मुहूर्त
मेष संक्रांति के दिन 14 अप्रैल को महापुण्य काल के दौरान स्नान-दान करने के उत्तम फल मिलते हैं। इस दिन अपनी क्षमतानुसार गरीबों को धन और अन्न दान करें, क्योंकि संक्रांति पर किए गए दान का 100 गुना फल मिलता है।
शुभ फल के लिए इन चीजों का करें दान
मेष संक्रांति पर सत्तू और मिट्टी के घड़े का दान जरूर करें। यह दान धार्मिक रूप से शुभ माना गया है। इस दिन लाल रंग की वस्तुएं जैसे चंदन, केसर, वस्त्र, फल और पुष्प अर्पित करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। इसके साथ ही गुड़ और गेहूं का दान समृद्धि लाता है। चने की दाल, हल्दी और पीले कपड़े दान करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। तिल, अन्न और सत्तू-गुड़ का दान करने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मेष संक्रांति के साथ ही 'खरमास' की समाप्ति भी होती है और मांगलिक कार्यों के द्वार खुल जाते हैं। मेष संक्रांति के बाद विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य शुरू किए जा सकते हैं।
मेष संक्रांति पर फटे-पुराने कपड़ों व जूतों आदि का दान नहीं करना चाहिए। अगर आप भोजन का दान कर रहे हैं, तो वह पूरी तरह से सात्विक होना चाहिए और जूठा नहीं होना चाहिए, वरना इससे भी आपको दान का पुण्य फल नहीं मिलता। आपको दान का पुण्य फल तभी मिल सकता है, जब आप इन जरूरी बातों का ध्यान रखें।