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Nautapa 2026: सूर्य करेंगे चंद्रमा के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश और शुरू होगा नौतपा, इन 3 चीजों के दान करने से प्रसन्न होंगे भगवान सूर्य

Nautapa 2026: नौतपा साल के उन नौ दिनों को कहा जाता है, जिसमें भीषण गर्मी पड़ती है। यह सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने पर शुरू होता है। सूर्य इस नक्षत्र में लगभग 15 दिन रहते हैं, लेकिन इसके शुरुआती 9 दिना काफी मुश्किल होते हैं। इसमें तीन चीजों का दान करने से सूर्य भगवान प्रसन्न होते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड May 22, 2026 पर 3:33 PM
Nautapa 2026: सूर्य करेंगे चंद्रमा के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश और शुरू होगा नौतपा, इन 3 चीजों के दान करने से प्रसन्न होंगे भगवान सूर्य
25 मई सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और नौतपा शुरू होगा।

Nautapa 2026: नौतपा उत्तर और मध्य भारत में मुख्य रूप से माना जाता है। साल के उन 9 दिनों को नौतपा कहते हैं, जिनमें भीषण गर्मी पड़ती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो नौतपा की शुरुआत होती है। सूर्य इस नक्षत्र में कुल 15 दिनों तक रहता है, लेकिन इसके शुरुआती 9 दिन सबसे खास माने जाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इन 9 दिनों में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी कम हो जाती है और सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं।

कब आता है 'नौतपा'?

नौतपा आमतौर पर हर साल मई के आखिरी हफ्ते (24 या 25 मई) से शुरू होता है और जून के शुरुआती दिनों तक चलता है। इस दौरान दोपहर में गर्म हवाएं (लू) चलती हैं और तापमान अपने चरम पर होता है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है: नौ (9) और तपा (तपना/गर्मी)। यानी लगातार 9 दिनों तक प्रचंड रूप से तपना। नौतपा को लेकर ग्रामीण इलाकों और मौसम के जानकारों के बीच एक बेहद प्रचलित मान्यता है "जितना तपेगा नौतपा, उतनी ही अच्छी होगी वर्षा।"

कब से शुरू होगा नौतपा?

पंचांग की गणना के अनुसार, इस साल नौतपा 25 मई से शुरू होगा। इसी दिन सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 2 जून तक यहीं रहेंगे। मान्यता है कि इन दिनों सूर्य अपनी सबसे तीव्र ऊर्जा के साथ पृथ्वी पर प्रभाव डालते हैं, जिससे गर्मी चरम पर पहुंच जाती है।

नौतपा 2026 का ज्योतिषीय महत्व

नौतपा का गहरा ज्योतिषीय संबंध है। सूर्य देव जब ज्येष्ठ मास में रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब अगले 9 दिन सबसे अधिक गर्म माने जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है। सूर्य का इसमें प्रवेश एक तरह का ऊर्जात्मक संतुलन बनाता है।

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