Pitra Paksha 2025: आज होगा तृतीया का श्राद्ध, जानें सही मुहूर्त और तरीका

Pitra Paksha 2025: हिंदू धर्म में हर साल 15-16 दिनों की अवधि पितरों को समर्पित होती है, जिसमें उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। पितृ पक्ष में तृतीया तिथि का श्राद्ध 10 सितंबर के दिन किया जाएगा। आइए जानें श्राद्ध का मुहूर्त और पूरी विधि

अपडेटेड Sep 10, 2025 पर 7:00 AM
पितृ पक्ष में इन तीन तिथियों में पितरों के श्राद्ध का बहुत महत्व बताया गया है।

Pitra Paksha 2025: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व है। इसमें अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। 15-16 दिनों की ये अवधि हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से शुरू होती है और आश्विन मास की अमावस्या पर खत्म होती है। माना जाता है कि इस दौरान हमारे पूर्वज अपने वंशजों को देखने के लिए धरती पर आते हैं। इस साल पितृ पक्ष की ये अवधि 07 सितंबर से शुरू हुई है और 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा। पंचांग के अनुसार, इस साल पितृ पक्ष में कुछ तिथियों का नुकसान हो रहा है, जिसकी वजह से इसकी अवधि घट गई है। इस बार तृतीया तिथि का श्राद्ध 10 सितंबर के दिन किया जाएगा।

तृतीया श्राद्ध 10 सितम्बर 2025, बुधवार

श्राद्ध के लिए शुभ मुहूर्त

कुतुप मुहूर्त : सुबह 11.53 बज से दोपहर 12.43 बजे तक

रौहिण मुहूर्त : दोपहर 12.43 बजे से दोपहर 1.33 बजे तक

अपराह्न मुहूर्त : दोपहर 1.33 बजे से शाम 4.02 बजे तक


श्राद्ध की विधि

  • सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें।
  • जहां श्राद्ध करना है, उस जगह को साफ करें। संभव हो तो गाय के गोबर से लीप कर और गंगाजल से पवित्र करें।
  • पितरों के लिए सात्विक भोजन तैयार करें।
  • ब्राह्मण से पितरों की पूजा और तर्पण कराएं।
  • पितरों का नाम लेकर श्राद्ध करने का संकल्प लें।
  • जल में काला तिल मिलाकर पितरों को तर्पण दें।
  • पितरों के नाम से अग्नि में गाय का दूध, घी, खीर और दही अर्पित करें।
  • चावल के पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करें।
  • ब्राह्मण को भोजन कराएं और क्षमतानुसार दान-दक्षिणा दें।
  • आशीर्वाद लेकर उन्हें विदा करें।
  • श्राद्ध में पितरों के अलावा कौए, देव, गाय, और चींटी को भोजन खिलाने का प्रावधान है।

पितृ पक्ष का महत्व

हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद परिजनों द्वारा श्राद्ध कर्म करना बहुत जरूरी माना गया है। ऐसा न करने से मृत व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है। पितृ पक्ष एक ऐसा अवसर होता है जब लोग अपने पुरखों के सम्मान में उन्हें भोजन और जल अर्पित करते हैं। माना जाता है कि इस अवधि में पितृ धरती पर अपने वंशजों से मिलने आते हैं। श्रद्धापूवर्क किए गए पिंडदान और तर्पण से संतुष्ट होकर वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।

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