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Pongal 2026: कब मनाया जाएगा 4 दिन का पोंगल पर्व, जानें इसका महत्व और पूजा विधि

पोंगल चार दिनों तक मनाया जाने वाला पर्व है। इन चारों दिनों का अपना अलग महत्व होता है। ये त्योहार नई फसल, प्रकृति और मेहनत के लिए आभार जताने का प्रतीक माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसी त्योहार अलग नामों से मनाया जाता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 12, 2026 पर 4:47 PM
Pongal 2026: कब मनाया जाएगा 4 दिन का पोंगल पर्व, जानें इसका महत्व और पूजा विधि
ये त्योहार नई फसल, प्रकृति और मेहनत के लिए धन्यवाद देने का प्रतीक होता है

पोंगल एक पवित्र फसल त्योहार है, जिसे हर साल पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। ये त्योहार खास तौर पर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में मनाया जाता है, लेकिन अब देश के दूसरे हिस्सों में भी लोग इसे पूरे उत्साह के साथ मनाने लगे हैं। दक्षिण भारत में पोंगल को नए साल की शुरुआत के रूप में भी देखा जाता है। ये त्योहार नई फसल, प्रकृति और मेहनत के लिए धन्यवाद देने का प्रतीक होता है। इस दौरान लोग सूर्य देव की पूजा करते हैं, क्योंकि यह समय सूर्य के उत्तर दिशा में जाने की शुरुआत को दर्शाता है।

पोंगल चार दिनों तक मनाया जाने वाला पर्व है। तमिल भाषा में 'पोंगल' का मतलब होता है 'उबालना'। यह त्योहार नई फसल, प्रकृति और मेहनत के लिए आभार जताने का प्रतीक माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में यही त्योहार अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे पूर्वी भारत में मकर संक्रांति, पंजाब में लोहड़ी और गुजरात में उत्तरायण।

कब से शुरू होगा पर्व

पंचांग के अनुसार, थाई पोंगल संक्रांति 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर होगी। द्रिक पंचांग के मुताबिक पोंगल का पावन पर्व इसी दिन से शुरू होता है। यह तमिल कैलेंडर के थाई महीने का पहला दिन माना जाता है, जो बेहद शुभ होता है। पोंगल चार दिनों तक मनाया जाता है। इन चारों दिनों का अपना अलग महत्व होता है और यह समय नई फसल, प्रकृति और सूर्य देव के प्रति आभार जताने का अवसर देता है।

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